लुधियाना में फर्जी तहसीलकर्मी बनकर फैक्ट्री मालिक को बैंक लोन का नोटिस भेजा। नोटिस क्लीयर करवाने के लिए आरोपी ने फैक्ट्री मालिक से 60 हजार रुपए रिश्वत मांगे। जिसमें से 20 हजार रुपए फैक्ट्री मालिक ने उसे दे दिए।रिश्वत की दूसरी किस्त देते समय फैक्ट्री मालिक ने शिकायत दी और विजिलेंस ने उसे 10 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई लुधियाना के कबीर नगर (बस्ती जोधेवाल) निवासी एक कपड़ा फैक्ट्री मालिक की शिकायत पर की गई है। उन्होंने बताया कि ट्रैप लगाकर आरोपी को पकड़ा गया। पूछताछ में पता चला कि वो एक रिवकरी एजेंट है और फर्जी तहसील कर्मी बनकर रिश्वत ले रहा था। कपड़ा व्यापारी को रिकवरी एजेंट ने कैसे ठगा जानिए.. डीआरटी में चल रहा है केस: शिकायतकर्ता साल 2007 से अपने घर की पहली मंजिल पर कपड़ा फैक्ट्री चला रहा है। उसने आईडीबीआई (IDBI) बैंक से 40 लाख रुपये का कैश क्रेडिट लिमिट लोन लिया था। लोन डिफॉल्ट होने के कारण यह मामला चंडीगढ़ के डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में चल रहा है। खुद को बताया तहसील का कर्मचारी: बीती 25 मई को आरोपी रवनीत सिंह शिकायतकर्ता के पास पहुंचा। उसने खुद को लुधियाना ईस्ट तहसील का कर्मचारी बताया और पीड़ित को एक नोटिस थमा दिया, जिस पर तहसील अथॉरिटी के जाली हस्ताक्षर थे। कब्जा रुकवाने के लिए मांगी रिश्वत: आरोपी ने पीड़ित को डराया कि बैंक 28 मई को उसकी फैक्ट्री पर कब्जा करने वाला है। उसने कब्जा टलवाने और लोन सेटलमेंट के लिए 3 महीने का समय दिलवाने के एवज में 60,000 रुपये रिश्वत की मांग की। जिसमें से 20 हजार रुपए आरोपी ने पहले ले लिए थे और अब दूसरी किस्त 10 हजार रुपए की लेनी थी। विजिलेंस ने जाल बिछाकर कैसे पकड़ा, जानिए… रिकॉर्ड कर ली बातचीत: आरोपी रवनीत सिंह ने सौदे के तहत अन्य अधिकारियों के नाम पर 20,000 रुपये की पहली किस्त पहले ही वसूल ली थी। जब वह 10,000 रुपये की दूसरी किस्त मांग रहा था, तब पीड़ित ने उसकी पूरी बातचीत अपने फोन में रिकॉर्ड कर ली। विजिलेंस दफ्तर में शिकायत: पीड़ित इस ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ विजिलेंस ब्यूरो रेंज, लुधियाना के पास पहुंचा और पूरी आपबीती सुनाई। विजिलेंस अफसरों ने शिकायतकर्ता को ट्रैप लगाने के बारे में समझाया और उसे पकड़ने की प्लानिंग की। रंगे हाथों गिरफ्तारी: शिकायत के आधार पर विजिलेंस की टीम ने तुरंत जाल बिछाया। दो सरकारी गवाहों को साथ लेकर टीम मौके पर तैनात हो गई। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी रवनीत सिंह को केमिकल लगे 10,000 रुपये थमाए, विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। जांच में खुली पोल, बैंक अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज विजिलेंस की शुरुआती जांच में आरोपी रवनीत सिंह का झूठ बेनकाब हो गया। वह तहसील का कोई सरकारी कर्मचारी नहीं निकला, बल्कि लुधियाना की ‘सेवियर रिकवरी एजेंसी’ का एक प्राइवेट एजेंट निकला, जो बैंक के लिए काम करता था। विजिलेंस ब्यूरो ने आरोपी के खिलाफ थाना लुधियाना में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आईडीबीआई बैंक या तहसील कार्यालय के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत सामने आती है, तो जांच के बाद उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
