अरब देशों में नौकरी का झांसा देकर मानव तस्करी का एक नया मामला सामने आया है। जालंधर जिले की एक युवती, जो ट्रैवल एजेंटों के जाल में फंसकर दुबई और फिर मस्कट पहुंच गई थी, राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से सुरक्षित अपने घर लौट आई है। वापस लौटी युवती ने मानव तस्करी के भयावह खुलासे किए हैं। उसने बताया कि मस्कट में उसने नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और भारत की कई लड़कियों को अमानवीय परिस्थितियों में देखा। युवती के अनुसार, इन लड़कियों को 1200 से 1350 रियाल तक की रकम के बदले एक मालिक से दूसरे मालिक को बेचा जा रहा है। पीड़ित युवती 14 फरवरी को अपने गांव की एक परिचित के माध्यम से बेहतर भविष्य की उम्मीद में दुबई के लिए रवाना हुई थी। उसे वहां अच्छे काम के साथ 40 हजार रुपये मासिक वेतन का वादा किया गया था। हालांकि, दुबई पहुंचने के बाद ट्रैवल एजेंटों ने उसे एक महीने तक वहीं रखा और फिर मस्कट भेज दिया। मस्कट में उससे सुबह तड़के से लेकर देर रात तक घरेलू काम करवाया जाता था। उसे सोने या आराम करने का कोई निश्चित समय नहीं मिलता था। सुबह पांच बजे से पहले उठना उसके लिए अनिवार्य था। युवती बोली- मेरे साथ होती थी मारपीट युवती ने बताया कि जब भी उसने भारत लौटने की इच्छा व्यक्त की, उसके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की जाती थी। उसे अपने परिवार से बात करने के लिए केवल 20 मिनट का समय दिया जाता था।उस कार्यालय में जहां उसे बंधक बनाकर रखा गया था, कई अन्य लड़कियां अपने परिवारों और बच्चों को याद कर रोती रहती थीं। उनकी एकमात्र इच्छा अपने देश वापस लौटना थी। पीड़िता के परिवार ने बताया कि 4 जून को उन्होंने संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मदद की गुहार लगाई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तुरंत विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से संपर्क किया, जिसके परिणामस्वरूप युवती 14 जून को सुरक्षित अपने वतन लौट आई। इस अवसर पर संत सीचेवाल ने कहा कि अरब देशों में बेटियों से जुड़े ऐसे मामले बेहद चिंताजनक हैं और मानव तस्करी के इस गैरकानूनी नेटवर्क पर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि विदेश में नौकरी के लालच में आने से पहले एजेंटों और कंपनियों की पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें, ताकि कोई अन्य बेटी ऐसे अंधेरे और दर्दनाक हालात का शिकार न बने। पीड़िता बोली- सुबह से रात तक काम कराया जाता था वापस लौटी पीड़ित युवती ने बताया कि वहां पहुंचने के बाद लड़कियों के पासपोर्ट और दस्तावेज छीन लिए जाते हैं और उनसे सुबह से आधी रात तक काम करवाया जाता है। उन्हें घरों या कार्यालयों में एक तरह से कैद करके रखा जाता है। न आराम करने की अनुमति होती है और न ही बाहर जाने की। कई लड़कियों को यह तक नहीं पता होता कि वे किस इलाके या शहर में हैं। विभिन्न देशों की लड़कियां अपने परिवारों से दूर एक जैसी पीड़ा झेल रही थीं। उन्हें पैसों के बदले एक मालिक से दूसरे मालिक के पास भेज दिया जाता था और घर वापस जाने की बात करने पर मारपीट, पैसों की मांग या सख्त व्यवहार का सामना करना पड़ता था।
