सरकारी खरीद में गिरदावरी शर्त हटाने को तैयार नहीं सरकार-एमएसपी पर फसल बेचने को ऑनलाइन पंजीयन में गिरदावरी की है अनिवार्यताहनुमानगढ़. खेतों में बर्बादी के बाद भी सरकारी तंत्र का दिल नहीं पसीज रहा। हालात ऐसे हैं कि प्रमाणित गिरदावरी के बिना किसान ऑनलाइन पंजीयन तक नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में मूंग उत्पादक किसान औने-पौने दामों पर फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि मूंग खरीद को लेकर हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिले में 27 सितम्बर से पंजीयन शुरू हैं। आठ अक्टूबर तक महज 93 पंजीयन ही हो पाए हैं। उसमें भी ज्यादातर में प्रमाणित गिरदावरी की इंट्री नहीं है। ऐसे में खरीद एजेंसी इस आवेदन को अधिकृत रूप से पंजीकृत नहीं मान रही है। जानकारी के अनुसार जब तक तहसीलदार से प्रमाणित गिरदावरी अपलोड नहीं होती, तब तक ऑनलाइन पंजीयन मान्य नहीं है। उक्त प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद खरीद एजेंसी आगे मूंग उत्पादक किसानों खरीद को लेकर निर्धारित दिनांक जारी करने का टोकन जारी करेगी। इसके बाद ही किसानों से सरकारी खरीद शुरू हो सकेगी। बताया जा रहा है कि चालू खरीफ सीजन में अब तक गिरदावरी का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। जिले में अब तक करीब 84 प्रतिशत क्षेत्रों में ही गिरदावरी पूर्ण की गई है। इसमें भी इनका तहसीलदार स्तर पर प्रमाणित करने का काम अभी जारी है। ऐसे में किसानों को सरकार की एमएसपी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हनुमानगढ़ जिले की बात करें तो इस बार सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। जबकि जिले की मंडियों में अभी इसके 5500 से 6300 रुपए प्रति क्विंटल भाव लग रहे हैं। इससे प्रति क्विंटल किसानों को दो से तीन हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार यदि किसानों को एमएसपी का लाभ देना चाहती है तो गिरदावरी आदि की शर्त हटाने की जरूरत है। सरकार को तत्काल इस बारे में सोचना होगा। नहीं तो किसानों के हाथ खाली रह जाएंगे।
