सवाई माधोपुर में भाई को लेपर्ड के मुंह से छुड़ाने वाली बहन ने कहा- वो मेरे भाई को खींच कर ले जा रहा था, भाई चिल्लाया तो मेरी नींद खुल गई। मैं लेपर्ड की तरफ झपटी, वो भाई को लेकर 3 फीट की दीवार पर चढ़ गया था। मैंने उसके पैर पकड़ लिए, इसके बाद लेपर्ड ने भाई को छोड़ा और भाग गया। टोडरा गांव में देर रात बिजली जाने से छत पर सो रहे परिवार के 15 साल के बच्चे पर लेपर्ड ने हमला कर दिया था। वह उसे सिर से दबोच कर जंगल में ले जा रहा था। बहन जाग गई और लेपर्ड से भिड़ गई। परिजन तुरंत घायल को हॉस्पिटल लेकर दौड़े। लेपर्ड के अटैक से मासूम के सिर पर दो जगह गहरे घाव हो गए। फिलहाल हॉस्पिटल में इलाज जारी है। पढ़िए खौफनाक रात की पूरी कहानी पर ये रिपोर्ट… लाइट गई तो छत पर सो रहा था परिवार पिता बद्रीलाल गुर्जर ने बताया- बिजली कटौती के कारण परिवार मकान की छत पर सो रहा था। छत पर दो जगह पास-पास बिस्तर लगाए गए थे। एक बिस्तर पर बेटा राज गुर्जर (15), मयंक गुर्जर (12) और विकास गुर्जर (13) सो रहे थे। दूसरे बिस्तर पर मां सीता देवी (45), बेटी राधा गुर्जर (20) और भतीजी आसा गुर्जर (15) सो रही थीं। वहीं पास की छत पर पड़ोसी कमल और उसका पुत्र विकास भी सो रहे थे। तीन मकानों की छत पार कर पहुंचा लेपर्ड बद्रीलाल गुर्जर ने बताया- रात करीब एक बजे तीन मकानों की छतों से होता हुआ मकान की छत पर पहुंच गया। वहां सो रहे बेटे राज गुर्जर के सिर को उसने तकिए सहित अपने जबड़ों में दबोच लिया और बिस्तर से करीब सात फीट दूर तक घसीटते ले गया। भाई की चीख सुनकर खुली बहन की नींद राज की चीख सुनकर पास ही सो रही उसकी बड़ी बहन राधा गुर्जर की नींद खुल गई। भाई की जान पर बना संकट देखकर भी राधा घबराई नहीं। इस दौरान लेपर्ड राज को घसीटते हुए मकान के अंतिम छोर की ओर ले गया। लेपर्ड और बहन के बीच चली खींचतान परिजनों ने बताया – जब लेपर्ड दीवार कूदने की कोशिश कर रहा था, तभी राधा ने भाई के पैर पकड़ लिए और पूरी ताकत से उसे अपनी ओर खींचने लगी। कुछ पल तक भाई की जिंदगी और मौत के बीच बहन और लेपर्ड के बीच खींचतान चलती रही। राधा का कहना है कि यदि कुछ सेकंड और देर हो जाती तो भाई को बचा पाना मुश्किल था। पड़ोसी की दीवार बनी जिंदगी की ढाल बद्रीलाल गुर्जर ने बताया- लेपर्ड आसानी से बेटे को नहीं छोड़ रहा था। पड़ोसी मकान की करीब तीन फीट ऊंची दीवार सामने आने से कमजोर पड़ गया। परिवार और पड़ोसियों के शोर-शराबे के बीच आखिरकार लेपर्ड राज को छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला। सिर में तीन जगह गहरे घाव, अस्पताल में इलाज जारी घटना के बाद घायल राज को तुरंत जिला हॉस्पिटल सवाई माधोपुर पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। राज के पिता बद्रीलाल गुर्जर के अनुसार लेपर्ड के दांतों से उसके सिर में तीन जगह गहरे जख्म लगे हैं। सिर में दो स्थानों पर करीब दो-दो इंच और कनपटी पर करीब डेढ़ इंच गहरा घाव हुआ है। इसके अलावा घसीटे जाने से उसकी पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आई हैं। परिजनों का कहना है कि बिजली कटौती के कारण परिवार छत पर सोने को मजबूर हुआ और इसी दौरान यह हादसा हो गया। ग्रामीणों ने वन विभाग का किया घेराव घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन दहशत और आक्रोश से भरे ग्रामीणों ने अधिकारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दो महीनों से लेपर्ड लगातार आबादी क्षेत्र में घूम रहे हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। उन्होंने गांव में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था, नियमित निगरानी और लेपर्ड को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की। दो महीने में 30 से अधिक घटनाएं ग्रामीणों के अनुसार टोडरा गांव में पिछले दो महीनों के दौरान लेपर्ड के आतंक से जुड़ी 30 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस दौरान कई बछड़ों, बकरियों और कुत्तों का शिकार किया जा चुका है। वहीं लोगों पर हमले की कोशिशों के मामले भी सामने आए हैं। 13 मई को वन विभाग ने एक लेपर्ड को पिंजरे में कैद किया था, लेकिन इसके बावजूद आबादी क्षेत्र में लेपर्ड की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
