मोहाली के सनौली क्षेत्र में एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किए जाने के सनसनीखेज मामले में पुलिस जांच का दायरा अब और बढ़ गया है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी आर.के. तिवारी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले के साथ-साथ उसकी शैक्षणिक योग्यता (डिग्री) और डॉक्टरी प्रैक्टिस के लाइसेंस की वैधता की भी गहनता से जांच शुरू कर दी है। पुलिस को 16 जून को दी गई शिकायत के अनुसार, पीड़ित नाबालिग लड़की अपनी किसी बीमारी के इलाज के लिए कथित डॉक्टर आर.के. तिवारी के पास गई थी। आरोप है कि इलाज के बहाने आरोपी ने नाबालिग की मजबूरी का फायदा उठाया और उसके साथ इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार, आरोपी की तलाश में छापेमारी मामले की तफ्तीश कर रहे जांच अधिकारी सहायक थानेदार (ASI) हरविंदर सिंह ने बताया कि पीड़िता का मेडिकल परीक्षण (Medical Examination) कराया जा रहा है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट का अभी इंतजार है। इसके साथ ही, वारदात के बाद से ही फरार चल रहे आरोपी आर.के. तिवारी की धरपकड़ के लिए पुलिस की विशेष टीमें उसके संभावित ठिकानों और ठियों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। फर्जी डॉक्टर होने का संदेह; पुलिस खंगाल रही है रिकॉर्ड जांच के दौरान पुलिस के सामने यह तथ्य भी आया है कि आरोपी आर.के. तिवारी पिछले कई वर्षों से गांव और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में क्लिनिक चलाकर लोगों का उपचार कर रहा था। इस इनपुट के बाद पुलिस को उसकी चिकित्सकीय योग्यता पर संदेह हुआ है। पुलिस जांच कर रही है कि क्या आरोपी के पास चिकित्सकीय कार्य करने के लिए कोई वैध और मान्यता प्राप्त डिग्री है? क्या स्वास्थ्य विभाग या संबंधित मेडिकल काउंसिल से उसे प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिला हुआ है? अन्य धाराएं जुड़ने की संभावना: पुलिस इस संबंध में स्वास्थ्य और संबंधित प्रशासनिक विभागों से रिकॉर्ड जुटा रही है। यदि जांच में यह साबित होता है कि आरोपी बिना किसी वैध डिग्री या सरकारी अनुमति के अवैध रूप से चिकित्सा सेवाएं दे रहा था (झोलाछाप डॉक्टर था), तो उसके खिलाफ धोखाधड़ी और मेडिकल एक्ट के तहत अतिरिक्त सख्त धाराएं जोड़ी जाएंगी। दो मुख्य बिंदुओं पर टिकी है जांच पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में जांच को दो मुख्य पहलुओं पर केंद्रित किया गया है—पहला, नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की गंभीरता; और दूसरा, आरोपी की चिकित्सकीय योग्यता व क्लीनिक की वैधता। दोनों ही मामलों की अंतिम रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आगामी कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।