पंजाब के लुधियाना जिले के जगराओं में आज कांग्रेस पार्टी ने पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ एक बेहद अनोखा और आक्रामक प्रदर्शन किया। जगराओं की पुरानी दाना मंडी में एकत्रित होकर कांग्रेस कमेटी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक ‘रेहड़ों’ पर बैठकर एक विशाल रोष मार्च निकाला। इस दौरान कांग्रेसियों ने न केवल केंद्र सरकार बल्कि पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की और दोनों सरकारों को आम जनता की जेब पर डाका डालने का जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेसी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने टैक्स कम करके पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तुरंत राहत नहीं दी, तो यह आंदोलन सड़कों से लेकर विधानसभा तक और उग्र किया जाएगा। इस मौके पर पार्षद जतिंदरपाल राना, पूर्व पार्षद अमन कपूर बोबी, दोनों ब्लॉक प्रधान नवदीप सिंह व हरप्रीत सिंह, गोपाल शर्मा, तरुण मल्होत्रा और गौरव वर्मा समेत बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। कृषि और उद्योगों पर दोहरी मार; खेती की लागत बढ़ी कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ईंधन में बढ़ोतरी ने पंजाब के किसानों को संकट में डाल दिया है। खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और खाद-बीज की ढुलाई पूरी तरह डीजल पर निर्भर है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। लुधियाना के स्थानीय उद्योगों में भी उत्पादन और माल की आपूर्ति महंगी होने के कारण कंपनियों को अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं, जिससे बाजार पूरी तरह मंदी और महंगाई की चपेट में है। स्कूल बस से लेकर ऑनलाइन डिलीवरी तक सब हुआ महंगा रोष मार्च में शामिल नेताओं ने बताया कि इस महंगाई का सबसे बड़ा और सीधा बोझ आम उपभोक्ता पर पड़ रहा है। आज के दौर में ऑटो-बस का किराया, दूध, फल-सब्जियों के दाम के साथ-साथ बच्चों की स्कूल बस की फीस और ऑनलाइन डिलीवरी जैसी आवश्यक सेवाएं भी महंगी हो चुकी हैं। पहले से ही घरेलू बजट बिगड़ा हुआ था और अब तेल व रसोई गैस की नई कीमतों ने जीना मुहाल कर दिया है। तेल की कीमतों ने तोड़ी आम आदमी की कमर: पूर्व विधायक जग्गा रोष प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक जगतार सिंह जग्गा ने कहा कि लगातार बढ़ती तेल कीमतों ने मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की कमर तोड़कर रख दी है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का सीधा और सबसे घातक असर देश की महंगाई दर पर पड़ता है, क्योंकि देश का परिवहन से लेकर औद्योगिक उत्पादन तक लगभग हर क्षेत्र पूरी तरह से ईंधन पर ही निर्भर है। डीजल महंगा होने से थाली से दूर हुआ राशन जगतार सिंह जग्गा ने कहा कि “जब भी डीजल महंगा होता है, तो ट्रकों, बसों और माल ढुलाई (Logistics) का खर्च तुरंत बढ़ जाता है। इसका सीधा नतीजा यह होता है कि मंडियों में आने वाली सब्जियां, फल, दालें, राशन और रोजमर्रा के इस्तेमाल का हर जरूरी सामान आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाता है। सरकारों की गलत नीतियों का खामियाजा गृहिणियों को भुगतना पड़ रहा है।”