Small Savings Schemes: जब बाजार ऊपर जाता है तो हर कोई रिस्क लेने को तैयार रहता है, लेकिन जैसे ही उतार-चढ़ाव बढ़ता है, लोग फिर सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागते हैं। इस समय कुछ ऐसा ही हो रहा है। छोटी बचत योजनाएं, जिन्हें लोग धीरे-धीरे भूल रहे थे, अब फिर से चर्चा में हैं। एक वक्त था जब पोस्ट ऑफिस, पीपीएफ और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट हर घर का हिस्सा होते थे। मां-बाप बच्चों के नाम खाते खुलवाते थे और थोड़ा-थोड़ा जोड़कर भविष्य सुरक्षित करते थे। मकसद सीधा था, जरूरत के समय काम आने वाला पैसा बनाना। आज भले ही म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और क्रिप्टो जैसे विकल्प सामने आ गए हों, लेकिन जब बाजार हिलता है तो इन पारंपरिक योजनाओं की अहमियत खुद-ब-खुद सामने आ जाती है।