रिफाइनरी को लेकर पिछली कांग्रेस सरकार पर हमलावर बीजेपी नेताओं पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जिन्हें रिफाइनरी की ए बी सी डी पता नहीं है, उनको बैठा-बैठाकर रिफाइनरी की प्रेस कांफ्रेंस करवा रहे हैं। जिनको रिफाइनरी क्या होती है, पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स क्या होता है, इसके फायदे क्या हैं? इसके बारे में पता नहीं है। वो भाषण ठोके जा रहे हैं। मुझ पर अटैक कर रहे हैं। आज के समय में एक मात्र वसुंधरा राजे हैं, जो रिफाइनरी पर हमारे कमेंट पर बोलने का अधिकार रखती हैं। केवल राजे को पता है कि हमने कोई गलती की है या नहीं। एग्रीमेंट में क्या कमी रही या नहीं रही। यह केवल वो ही क्लियर कर सकती थीं। गहलोत ने आज अपने आवास पर मीडिया से बात करते हुए यह सब बातें कहीं। चार साल तक रिफाइनरी का काम क्यों बद रखा गहलोत ने कहा कि आज यह रिफाइनरी के उद्घाटन पर पीएम को बुला रहे हैं। लेकिन मैं तो इनसे सवाल पूछता हूं कि आपने चार साल तक इसका काम बंद क्यों रखा। फिर आपने देखा कि कहीं चुनाव न हार जाएं। तब आपने प्रधानमंत्री को बुलाया और कार्य प्रारंभ करने के नाम पर उनका प्रोग्राम रखा, जबकि शिलान्यास हो चुका था। हमारे समय में सोनिया गांधी और तत्कालीन मंत्री वीरप्पा मोइली आए थे। इतना बड़ा प्रोजेक्ट था, आज सात साल देरी से शुरू हो रहा है। 37 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट 80 हजार करोड़ तक पहुंच गया। फर्क तो पड़ता है, पैसा तो पब्लिक का ही है। जो रिफाइनरी को यह सेटबैक लगा है, इसका दोष किसका है। भजनलाल नाम की किसानी करते होंगे
सीएम भजनलाल शर्मा पर तंज कसते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अब क्या-क्या बोलूं मैं मुख्यमंत्री के बारे में। वो 20 दिन काम करके किसान बन सकते हैं। किसान तो थे ही ये। अब मुख्यमंत्री बने हैं तो अनुभव काम में लें। मुझे तो लगता है कि ये केवल नाम की किसानी करते होंगे और खुद 15-20 दिन मुश्किल से जाते होंगे। वही अनुभव इनका काम आ रहा है। अब बोल रहे हैं कि किसान लोग सभी 15-20 दिन ही काम करते हैं। अरे, किसान खून-पसीना बहाता है, लगातार महीनों तक मेहनत करता है, तब जाकर फसल आती है। फिर ओलावृष्टि हो जाती है, कोई बीमारी लग जाती है, फसल खराब हो जाती है। तब उसके दिल में कितनी आग लगती है। इसलिए इस प्रकार की बातें किसान के बारे में नहीं करनी चाहिए।