मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को जयपुर में ‘संसदीय संकुल परियोजना’ को लेकर एक अहम बैठक की। इस मीटिंग में आदिवासी क्षेत्रों के विकास और वहां से होने वाले पलायन को रोकने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ‘आकांक्षी जिला’ योजना की तर्ज पर अब प्रदेश में ‘आकांक्षी ग्राम’ विकसित किए जाएंगे। फिलहाल चुनिंदा गांवों में विकास के काम होंगे कि वहां के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही काम मिल सके। उदयपुर, सलूंबर और डूंगरपुर के 30 गांवों पर फोकस
बैठक में उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत और राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया ने अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश की। अभी भारतीय जनता पार्टी की ओर से उदयपुर के देवास, सलूंबर के चावंड और डूंगरपुर के सागवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में तीन ‘संसदीय संकुल’ चलाए जा रहे हैं। इन संकुलों के तहत 30 गांवों को चुना गया है। इन गांवों में खेती-बाड़ी, बागवानी, पढ़ाई, इलाज, हुनर सिखाने (स्किल डेवलपमेंट) और पानी बचाने जैसे कामों पर खास जोर दिया जा रहा है। मकसद यही है कि गांव का पैसा और गांव का हुनर गांव में ही रहे। सभी ने माना कि अगर गांवों में ही सुविधाएं और रोजगार मिल जाएं, तो पलायन की समस्या जड़ से खत्म हो सकती है। पलायन का मुद्दा सबसे ऊपर रहा
मीटिंग में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठक वी. सतीश ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में पलायन एक गंभीर समस्या है। लोग काम की तलाश में भटकते हैं, जिससे उनके परिवार और बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है। नीति आयोग के सुझावों के आधार पर अब समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं और सरकारी विभागों को मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इन गांवों में मल्टी-लेवल पर काम करें। उन्होंने साफ किया कि सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि हर हाथ को काम मिले और आदिवासी भाई-बहनों का जीवन स्तर सुधरे। ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री के साथ उनके अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा, टीएडी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुंजीलाल मीणा और सीएमओ के संयुक्त सचिव उत्तम कौशल मौजूद थे। इनके अलावा पुणे से आए कपिल सहस्रबुद्धे, श्री प्रसाद, विकास सहयोगी ओमप्रकाश गुर्जर और सीबी मीणा भी शामिल हुए।
