राजस्थानी और हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिलने की खुशी में रविवार को जयपुर में ‘हरख उछब’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्यभर से आए साहित्यकारों, कलाकारों और भाषा प्रेमियों ने एकत्रित होकर उनका सम्मान किया और राजस्थानी भाषा-संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। सम्मान समारोह में सुप्रसिद्ध कवि, आलोचक और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अर्जुनदेव चारण ने कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि राजस्थानी भाषा की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और उससे जुड़े व्यक्तित्व का गौरव है। उन्होंने डॉ. सोनी की पुरस्कृत कृति ‘भरखमा’ को साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एक सच्चा रचनाकार समय की सीमाओं से परे जाकर कालजयी होता है और अपनी स्मृतियों के माध्यम से अतीत को जीवंत करता है। प्रख्यात कथाकार रामस्वरूप किसान ने कहा कि जब कोई प्रशासनिक अधिकारी साहित्यकार भी होता है, तो वह समाज के लिए और भी अधिक मूल्यवान बन जाता है। उन्होंने डॉ. सोनी को मातृभाषा का सशक्त और संवेदनशील रचनाकार बताया। वहीं, कथाकार एवं संपादक मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने उनकी रचनाओं को उत्तर-आधुनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच सेतु का कार्य करते हैं। प्रो. जगदीश गिरी ने डॉ. सोनी की कहानियों में निहित संवेदनाओं, संघर्ष और सौंदर्य का विश्लेषण किया, जबकि मेजर रतन जांगिड़ ने उनके कहानी संग्रह पर पत्रवाचन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सत्यनारायण सोनी ने करते हुए इसे राजस्थानी भाषा और संस्कृति के उत्सव का प्रतीक बताया। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थानी तिमाही ‘कथेसर’ और सोनी सांवता एंटरटेनमेंट के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस मौके पर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी की साहित्यिक यात्रा पर भी प्रकाश डाला गया।
उनकी राजस्थानी और हिन्दी में अब तक 15 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उनकी कहानी पर आधारित ‘भरखमा’ नामक राजस्थानी फिल्म भी बन चुकी है। वर्तमान में वे आईएएस अधिकारी के रूप में मुख्यमंत्री के सचिव और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान में शासन सचिव के पद पर कार्यरत हैं। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राजेंद्र बारहठ द्वारा प्रस्तुत राजस्थानी वाणी वंदना से हुई, जबकि कवि विनोद स्वामी ने स्वागत उद्बोधन दिया। अंत में राजस्थानी फिल्म अभिनेता, निर्माता और निर्देशक श्रवण सागर ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मातृभाषा के संवर्धन के लिए वे निरंतर प्रयासरत रहेंगे।