फरीदकोट जिले में बेमौसमी बारिश के कारण किसानों की खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा है। हालांकि इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा स्पेशल गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। लेकिन मंगलवार को गांव पिपली समेत अन्य गांवों में प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेते हुए भारतीय किसान यूनियन पंजाब के नेताओं को इस घोषणा पर ज्यादा भरोसा नहीं है। इस बार बेमौसमी बारिश के चलते जिले में गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कई किसानों के 100% फसल तक खराब कई किसानों की 100 प्रतिशत फसल खराब हो चुकी है, जबकि अन्य किसानों की फसल की पैदावार पर भी गंभीर असर पड़ेगा। पिपली गांव में भी बड़े स्तर पर नुकसान दर्ज किया गया है। प्रभावित किसानों ने कहा कि भले ही मुख्यमंत्री और पंजाब सरकार द्वारा मुआवजे का ऐलान किया गया है। लेकिन पिछले अनुभवों के आधार पर उन्हें इस बार भी उचित मुआवजा मिलने की उम्मीद कम है। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन पंजाब के प्रदेश महासचिव भूपिंदर सिंह औलख और जिला प्रधान राजवीर सिंह गिल ने कहा कि खेती अब लाभदायक व्यवसाय नहीं रह गया है, जिसके चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को बचाने के लिए केंद्र और पंजाब सरकार को ठोस कृषि नीति बनानी चाहिए, लेकिन इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। नुकसान की भरपाई के लिए ठोस नीति बनाई जाए-किसान नेता इस मौके पर किसान नेता भूपिंदर सिंह औलख व राजवीर सिंह गिल ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण पहले भी कई बार फसलों को नुकसान हुआ है, लेकिन किसी भी सरकार ने पूरी भरपाई नहीं की। इसलिए अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने किसान मांग रखी कि कॉरपोरेट घरानों की तरह किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए। फसल बीमा पॉलिसी की शर्तों को आसान बनाया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी दी जाए। इसके साथ ही छोटे किसानों को खेती के लिए जरूरी साधन सब्सिडी पर उपलब्ध करवाने की भी मांग की गई है।