14 अक्टूबर 2025 को जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर दौड़ती एसी स्लीपर बस में अचानक आग लग गई। हादसे में कई लोगों का पूरा परिवार खत्म हो गया। जैसलमेर जिले के ही भागु का गांव के रहने वाले 80 साल के शोराब खान भी उन्हीं बदनसीबों में से एक हैं। हादसे में शोराब के बेटे पीर मोहम्मद, उसकी पत्नी और 3 बच्चों की मौत हो गई। 6 महीने बीत जाने के बाद भी शोराब खान बेटे और उसके परिवार की मौत के बाद मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता के लिए चक्कर काट रहे हैं। आर्थिक सहायता की राह में रोड़ा बन रहा है एक नियम। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 14 अक्टूबर 2025 को पीर मोहम्मद भागू का गांव जाने के लिए पत्नी इमामत, बेटे इरफान, यूनुस और बेटी हसीना के साथ जैसलमेर से बस में बैठे थे। पीर मोहम्मद ने परिवार को स्लीपर सीट पर बिठाया और खुद गैलरी में खड़े हो गए थे। अचानक बस में आग लग गई। पीर मोहम्मद ने बस का कांच तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन तोड़ नहीं पाए। उनका बेटा इरफान और बेटी हसीना जिंदा जल गए थे। दूसरे बेटे यूनुस की 15 अक्टूबर को एमजीएच जोधपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। 20 अक्टूबर को उनकी पत्नी इमामत ने भी दम तोड़ दिया था। 29 अक्टूबर को जयपुर में इलाज के दौरान पीर मोहम्मद की भी मौत हो गई थी। केंद्र और राज्य सरकार ने की थी आर्थिक सहायता की घोषणा
हादसे के तत्काल बाद राज्य सरकार की तरफ से प्रत्येक मृतक के आश्रित को 10 लाख और केंद्र की तरफ से 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई थी। एक ही परिवार में मृतकों की संख्या 3 या इससे ज्यादा होने पर राज्य सरकार की तरफ से 25 लाख रुपए फिक्स और केंद्र की ओर से 2 लाख रुपए प्रति मृतक आर्थिक सहायता की घोषणा की गई। 25 लाख रुपए में 15 लाख रुपए मुख्यमंत्री सहायता कोष और 10 लाख रुपए मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना से देना तय किया गया था। इस घोषणा के अनुसार, पीर मोहम्मद के आश्रितों को कुल 35 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मिलनी थी। राज्य सरकार की तरफ से पीर मोहम्मद के बैंक खाते में मुख्यमंत्री सहायता कोष से स्वीकृत 15 लाख रुपए और केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता तो जमा हो गई, लेकिन मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना के 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता आज तक जमा नहीं हो पाई है। जनाधार में नाम नहीं, इसलिए नहीं मिल रही आर्थिक सहायता
पीर मोहम्मद की मौत के बाद सरकार की आर्थिक सहायता के बाकी बचे 10 लाख रुपए मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना से दिए जाने हैं। इसी वजह से पेच फंसा हुआ है। नियमानुसार मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना में सहायता के लिए परिवार का ही कोई सदस्य आवेदन कर सकता है। सदस्य, जिसका नाम परिवार के जनाधार कार्ड में हो। शोराब का नाम पीर मोहम्मद के जनाधार कार्ड में नहीं है। पड़ताल के दौरान हमें 19 नवम्बर 2025 को जोधपुर कलेक्टर कार्यालय के आपदा प्रबंधन एवं सहायता की प्रभारी अधिकारी अंजुम ताहिर सम्मा का सीएमओ जयपुर को भेजा एक लेटर मिला। लेटर में लिखा था कि शोराब खान का नाम पीर मोहम्मद के जनाधार में नहीं है, ऐसे में उनका मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना योजना में आवेदन संभव नहीं हो पा रहा है। 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का भुगतान दिया जाए या नहीं के संबंध में मार्गदर्शन दें। इसके बाद सरकार ने इस संबंध में शोराब खान को भुगतान के लिए राज्य वित्त बीमा निगम से मार्गदर्शन मांगा। इसके जवाब में कार्यालय परियोजना निदेशक, मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना ने 27 जनवरी 2026 को लेटर भेज कर जल्द भुगतान के लिए जोधपुर कलेक्टर कार्यालय से ये जानकारियां मांगी। पहली : मृतक पीर मोहम्मद के जनाधार परिवार संख्या 5110852850 में दुर्घटना से पूर्व कौन-कौन सदस्य थे? किन-किन सदस्यों की मृत्यु हुई है ? दूसरी : मृतक के पिता शोराब खान के जनाधार परिवार संख्या 4856243274 में दुर्घटना से पूर्व एवं बाद में कौन-कौन सदस्य थे ? इसके जवाब में 17 मार्च 2026 को जोधपुर जिला कलेक्टर कार्यालय के आपदा प्रबंधन एवं सहायता की प्रभारी अधिकारी अंजुम ताहिर सम्मा ने बताया कि पीर मोहम्मद के जनआधार संख्या 5110852850 में दुर्घटना से पूर्व 4 सदस्य एवं मुखिया पीर मोहम्मद स्वयं थे। दुर्घटना में परिवार के 4 सदस्य पत्नी इमामत, बेटे इरफान, यूनुस और बेटी हसीना सहित परिवार के मुखिया पीर मोहम्मद की मौत हो गई। मृतक के पिता शोराब खान के जनआधार परिवार संख्या 4856243274 में हादसे से पहले और बाद में भी शोराब खान इकलौते ही सदस्य हैं। उनकी पत्नी हकीमा की पहले ही मौत हो चुकी है। शोराब बोले- अब तो चक्कर काटने में शर्म आने लगी है
80 साल के शोराब खान कहते हैं- अगर ये दस लाख रुपए नहीं देने थे तो फिर बाकी के 25 लाख भी क्यों दिए? गांव का ही एक भला लड़का जलालुद्दीन इस मामले को लेकर सरकार और सरकारी अफसरों के पास चक्कर काट रहा है। जलालुद्दीन का कहना है कि शोराब खान की पत्नी हकीमा की पहले ही मौत हो गई थी। वो अपने बेटे पीर मोहम्मद के साथ ही रहते थे। गांव में आम लोगों की तरह ही दोनों पिता-पुत्र के राशन कार्ड अलग-अलग बने हुए थे। ऐसे ही एक मामले में दूसरे परिवार को पूरी आर्थिक सहायता
जलालुद्दीन ने हमें बताया कि इस आखिरी लेटर के बाद क्या हुआ है? कुछ पता नहीं चल पाया है। उनका दावा है कि ऐसे ही एक मामले में बालेसर के डेचू के एक अन्य परिवार को पूरी आर्थिक सहायता दी गई है। उनके भी परिवार में सभी लोगों की मौत हो गई थी। जलालुद्दीन के दावे के बाद हमने जोधपुर कलेक्टर कार्यालय के आपदा प्रबंधन एवं सहायता की प्रभारी अधिकारी अंजुम ताहिर सम्मा से बात की। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद ऐसे पीड़ित परिवार के लिए 15 लाख रुपए सीएम रिलीफ फंड व 10 लाख रुपए मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना से दिए जाने थे। जो पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना में पंजीकृत नहीं थे, उन्हें पूरे 25 लाख रुपये की सहायता सीएम रिलीफ फंड से दी गई। डेचू के जिस मामले की आप बात कर रहे हैं, उसमें भी पूरा परिवार खत्म हो गया था। वह परिवार मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना में पंजीकृत नहीं था। ऐसे में उन्हें सीएम रिलीफ फंड से पूरे 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दे दी गई। पीर मोहम्मद (मृतक) मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना में रजिस्टर्ड थे। योजना में आर्थिक सहायता लेने वाले परिवार के सदस्य का उसी जन-आधार में दर्ज होना जरूरी होता है। अब यह तकनीकी समस्या है, जिसके संबंध में जैसलमेर जिला कलेक्टर कार्यालय से बात कर सहायता राशि पीर मोहम्मद के पिता को दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पति-पत्नी, तीन बेटियों और बेटे की मौत, मां को मिली थी आर्थिक सहायता
डेचू गांव के रहने वाले महेंद्र मेघवाल जैसलमेर के आर्मी डिपो में तैनात थे। वो दिवाली की छुट्टी में जैसलमेर से अपने घर जोधपुर लौट रहे थे। जैसलमेर बस हादसे में महेंद्र के साथ उनकी पत्नी पार्वती, बेटी खुशबू, बेटी, दीक्षा और बेटे शौर्य की मौत हो गई थी। इस मामले में महेंद्र की मां को आर्थिक सहायता राशि दी गई थी। एक्सपर्ट बोले- सिस्टम को फ्लेक्सिबल होना चाहिए
लीगल एक्सपर्ट एडवोकेट अनिल सोनी कहते हैं- बीमा नियमों के मुताबिक, क्लेम का भुगतान आश्रित को होता है और आश्रित की पहचान जरूरी है। परिवार में कानूनी पात्र होना चाहिए। इस केस में पूरा परिवार खत्म है और सीधा आश्रित मौजूद नहीं है। पिता शोराब खान का जनआधार अलग है। जिम्मेदारों को सोचना चाहिए कि बीमा नियम इंसानियत से बड़े नहीं हो सकते हैं। संवेदनशील मामलों में मदद देने के लिए सिस्टम को फ्लेक्सिबल होना चाहिए। —— जैसलमेर बस अग्निकांड की ये खबरें भी पढ़िए… 1- राजस्थान में AC बस में आग, 20 यात्री जिंदा जले, 15 लोग झुलसे; बचने के लिए चलती गाड़ी से कूदे लोग राजस्थान के जैसलमेर में जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर 14 अक्टूबर 2025 दोपहर 3.30 बजे चलती एसी स्लीपर बस में आग लग गई थी। 20 यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई थी। पढ़ें पूरी खबर… 2- जलती बस से कूदकर दौड़े थे पैसेंजर्स,जले हुए बैठे रहे, महिला चिल्लाई यहां एक लेडीज है, पहले उन्हें ले जाओ जैसलमेर में 14 अक्टूबर 2025 को बस में आग लगने के बाह हर तरफ चीख-पुकार मची थी। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। बस से कूदने के बाद जो जहां गिरा वहीं बैठा रह गया था। पढ़ें पूरी खबर…
