पेपर लीक मामले में गिरफ्तार राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा की अंतरिम जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट से पहले कटारा को अंतरिम जमानत मिली थी। राजस्थान सरकार की तरफ से दायर काउंटर एफिडेविट में उठाई गई आपत्तियों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद शर्मा की बैंच ने अंतरिम जमानत रद्द करने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को ही बाबूलाल कटारा को अंतरिम जमानत दी थी। राज्य सरकार ने इसके खिलाफ अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा के माध्यम से काउंटर एफिडेविट दायर कर अंतरिम जमानत जारी रखने का विरोध किया था। इसमें कई तथ्यों को रखा गया।
कोर्ट में राज्य सरकार का तर्क राज्य सरकार की तरफ से दायर काउंटर एफिडेविट में बताया गया कि कटारा के खिलाफ 5 मामले लंबित है, जिनमें एक मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) में दर्ज है। तर्क दिया गया कि आरोपी आरपीएससी सदस्य रहते पेपरलीक जैसे मामले में शामिल है। ऐसे में जनहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। जांच की निष्पक्षता के लिए न्यायिक हिरासत की जरूरत से संबंधित तथ्यों को रखा गया। सरकार ने तर्क दिया कि अंतरिम जमानत एक अपवादात्मक राहत है, जिसे ऐसे मामले में जारी नहीं रखा जा सकता। अंतरिम जमानत एक विवेकाधीन और अस्थायी राहत है, जिसे तथ्यों, आचरण और बाद में उत्पन्न परिस्थितियों के आधार पर निरस्त किया जा सकता है। इन सब तथ्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कटारा को दी गई अंतरिम जमानत को खारिज कर दिया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से करवाई पैरवी कटारा के मामले में एएजी शिवमंगल शर्मा के अलावा अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय को भी अतिरिक्त महाधिवक्ता के दफ्तर में इस केस के कॉर्डिनेशन के लिए नियुक्त किया गया था। इस मामले में राज्य की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय, एएजी शिव मंगल शर्मा के साथ एडवोकेट अनिशा रस्तोगी और सोनाली गौर ने भी पैरवी की। परीक्षा से 60 दिन पहले ही पेपर हो गया था लीक चार्जशीट से सामने आया था कि 24 दिसंबर 2022 को होने वाले सीनियर टीचर एग्जाम का पेपर परीक्षा से 60 दिन पहले अक्टूबर में ही लीक हो गया था। बाबूलाल कटारा पेपर तैयार होते ही सभी सेट की मूल कॉपी अपने सरकारी आवास पर ले गया था। कटारा के पास विशेषज्ञों से पेपर सेट कराने की जिम्मेदारी थी। कटारा ने अपने भांजे विजय डामोर से सभी सवाल रजिस्टर में लिखवा लिए थे। इसके बाद उसने प्रिंटिंग के लिए पेपर वापस ऑफिस में जमा करा दिया था। भांजे विजय के लिखे रजिस्टर को कटारा ने मास्टरमाइंड शेर सिंह मीणा को दिया था। शेर सिंह ने इसकी फोटो अपने मोबाइल में खींची थी। फोटो से पेपर टाइप कर गिरोह को बेच दिया था। बाद में सबूत मिटाने के लिए रजिस्टर को जला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा था 9 फरवरी को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कटारा को अंतरिम जमानत देते हुए राज्य सरकार से इस मामले में अब तक की जांच और दूसरे पहलुओं पर दो सप्ताह में जवाब मांगा था। अंतरिम जमानत के बाद भी कटारा ईडी मामले में जेल में 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी कटारा को जेल में ही रहना पड़ा। कटारा एसआई भर्ती-2021 पेपर लीक मामले और ईडी मामले में भी गिरफ्तार है, ईडी मामले में जमानत नहीं मिली थी। एसओजी ने RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा, उसके भांजे विजय डामोर और ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के निर्देश दिए थे 9 फरवरी को कटारा को अंतरिम जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाबी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने काउंटर एफिडेविट में चार्जशीट का विवरण, अभियोजन पक्ष के गवाहों की संख्या, आरोप तय होने की स्थिति, यदि आरोप तय नहीं हुए हैं तो देरी के कारण, मुकदमे की प्रगति, याचिकाकर्ता का आपराधिक रिकॉर्ड और क्या किसी सह-आरोपी को जमानत दी गई है जैसे विवरण देने को कहा था। —
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