सलूम्बर जिले में ईद-उल-फितर का त्योहार हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया। रमजान माह के अंतिम दिन चांद दिखने के बाद मुस्लिम समुदाय में सुबह से ही उत्साह का माहौल था। शहर की प्रमुख मस्जिदों-बाहर शहर क्षेत्र, तुर्की दरवाजा स्थित जामा मस्जिद और मुस्तफा कॉलोनी की रजा मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। इन मस्जिदों से नमाजियों के जत्थे गाजे-बाजे के साथ जुलूस के रूप में ईदगाह स्थलों की ओर रवाना हुए। सेरिंग तालाब और बांसवाड़ा रोड स्थित इंदगाहों में सैकड़ों लोगों ने एक साथ ईद की विशेष नमाज अदा की। नमाज के दौरान देश में अमन-चैन, खुशहाली और अच्छी बारिश के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं।
भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया इस अवसर पर मौलानाओं ने भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया। बाहर शहर के मौलाना इमाम यामीन रजा कादरी, अंदर शहर के मौलाना रफाउल हसन और मुस्तफा कॉलोनी के मौलाना मुजीबुर्रहमान ने अपने संबोधन में कहा कि ईद का त्योहार त्याग, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से आपसी सौहार्द बनाए रखने और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की। मौलानाओं ने इसे रहमत और बरकत का समय बताते हुए सभी को नेक रास्ते पर चलने का संदेश भी दिया। एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। घरों में दूध और मेवों से बनी सेवइयां सहित विभिन्न पकवान तैयार किए गए। नए परिधानों में सजे लोगों ने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ खुशियां बांटी, जिससे समाज में भाईचारे का संदेश और मजबूत हुआ। सलूम्बर में मनाई गई ईद ने एक बार फिर यह दर्शाया कि त्योहार केवल खुशियां बांटने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और सौहार्द को मजबूत करने का भी अवसर प्रदान करते हैं।