उदयपुर की लाइफलाइन कही जाने वाली पिछोला और फतहसागर झीलें अब भीषण गर्मी तपने से पहले ही लबालब करने की तैयारी है। शहर में बढ़ते तापमान और पीने के पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। जल संसाधन विभाग ने देवास परियोजना से पानी छोड़ने के आदेश जारी कर दिए हैं। 20 मार्च यानी कल से देवास प्रथम और द्वितीय के आकोदड़ा और मांडली बांध के गेट खोल दिए जाएंगे, जिससे बहता हुआ पानी शहर की इन दोनों प्रमुख झीलों में पहुंचेगा। दरअसल, मार्च के महीने में ही सूरज के तेवर तीखे होने लगे हैं और शहर में पानी की खपत अचानक बढ़ गई है। प्रशासन को अंदेशा था कि अगर समय रहते झीलों का जलस्तर नहीं बढ़ाया गया, तो मई-जून की तपती गर्मी में उदयपुर को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पीएचईडी और जल संसाधन विभाग ने मिलकर यह तकनीकी प्लान तैयार किया। देवास परियोजना के बांधों में अभी पर्याप्त पानी उपलब्ध है, जिसे टनल के जरिए झीलों की ओर डाइवर्ट किया जाएगा। इस कदम से न केवल नलों में पानी का प्रेशर बढ़ेगा, बल्कि गर्मियों में होने वाली संभावित किल्लत से भी शहरवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए सभी जरूरी तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गेट खोलने से पहले टनल और नहरों के प्रवाह मार्ग की बारीकी से जांच की गई है ताकि पानी का बहाव बिना किसी रुकावट के सीधे झीलों तक पहुंचे। इस खबर के बाद उदयपुर के पर्यटन जगत और आम जनता में खुशी की लहर है। खाली होती झीलों को देखकर होटल व्यवसायी और बोटिंग संचालक चिंतित थे, क्योंकि पर्यटन पूरी तरह झीलों की खूबसूरती पर टिका है। अब लबालब झीलें देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर खींचेंगी, जिससे स्थानीय बाजार और रोजगार को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने सख्त एडवाइजरी भी जारी की है। सीसारमा नदी और नांदेश्वर क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष तौर पर सावधान रहने को कहा गया है। चूंकि बांधों से पानी छोड़ने के बाद नदी के बहाव क्षेत्र में जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, इसलिए लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। ग्रामीणों और चरवाहों से भी अपील की गई है कि वे अपने मवेशियों को पानी के बहाव वाले रास्तों पर न ले जाएं और उन्हें सुरक्षित ऊंचाइयों पर ही रखें। जल संसाधन विभाग की टीमें पूरे प्रवाह मार्ग पर मुस्तैद रहेंगी ताकि पानी चोरी या किसी भी तरह की दुर्घटना को टाला जा सके। अधिकारियों का कहना है कि मानसून आने में अभी वक्त है, ऐसे में यह बैकअप प्लान शहर की जलापूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए सबसे कारगर साबित होगा।
