अलवर में सरिस्का के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) मामले में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताते हुए उनसे कहा कि CTH प्लान को लेकर आप गलत कर रहे हैं। दरअसल, अलवर मिनी सचिवालय में बुधवार को CTH मामले में मीटिंग हुई। इसमें जूली ने कलेक्टर डॉ. अर्तिका शुक्ला, CCF संग्राम सिंह और DFO अभिमन्यु साहरण से सवाल किए। उन्होंने बार-बार पूछा कि बताओ, आप टहला की खानें चलवाने के लिए CTH बदल रहे हैं या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वन राज्य मंत्री संजय शर्मा के दबाव में हैं। यह बड़ा घोटाला है। सबकी मिलीभगत से हो रहा है। जूली के मीटिंग से बाहर आते ही टहला के पालवा गांव निवासी कमलेश कुमार मीणा ने जूली से कहा- हम भी कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। हमें नए सीटीएच प्लान से कोई आपत्ति नहीं है। पहले हमें घर बनाने के लिए पत्थर तक नहीं मिल पाते थे। आप गलत बातें फैला रहे हैं। कमलेश के साथ करीब 20 से 30 ग्रामीण पहुंचे थे। इसके बाद जूली के पीछे खड़े कार्यकर्ता और आसपास के गांवों के लोग आपस में उलझ गए। बीच-बचाव के लिए पुलिसकर्मियों को आना पड़ा। ‘यह बड़ा घोटाला, जांच होनी चाहिए’ मीटिंग के बाद जूली ने कहा- शहर से जुड़े एरिया को सीटीएच में लाना चाहते हैं और दूर के एरिया को हटा रहे हैं। इसमें बड़ा घोटाला है, जिसके कारण बदलना चाहते हैं। मीटिंग में कलेक्टर और डीएफओ से पूछा कि सीटीएच बदलना क्यों चाहते हैं? इसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि टाइगर की ब्रीडिंग रुकी हो या कुनबा नहीं बढ़ा हो, तब बदलाव करें तो समझ आता है। पूरे देश में टाइगर से जुड़े वन्यजीव प्रेमियों ने तय कर सीटीएच बनाया था। अब खनन के लोग तय करेंगे कि सीटीएच कहां बनेगा। यह बड़ा घोटाला और घपला है। इसकी जांच होनी चाहिए। सीटीएच नहीं बदलना चाहिए। गरीब और किसान की जमीन पर सीटीएच बनाने की तैयारी है। दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए जूली ने कहा- हमने कई बार पूछा कि सीटीएच बदलाव होने से खनन खुल जाएगा। वे कह रहे हैं- खुल जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों मंत्री अलवर से हैं। अधिकारियों पर भारी दबाव है। उनका दबाव हटना चाहिए। दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। जूली बोले- विकास के लिए पीछे नहीं हटेंगे जूली ने कहा कि घोटाले में शामिल लोगों की जांच होनी चाहिए। हम पूरी लड़ाई लड़ेंगे। अलवर के विकास के लिए पीछे नहीं हटेंगे। जनता की लड़ाई लड़ेंगे। बाघों को बचाएंगे। अब अलवर में कोई रिसोर्स नहीं है। केवल सरिस्का बचा है। इसे नहीं बचाया तो रोजगार नहीं मिलेंगे। एक सरिस्का बचा है उसे भी खत्म करना चाहते हैं। जानिए क्या है क्रिटिकल टाइगर हैबिबेट क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट जंगल का वह एरिया है, जहां टाइगर का मूवमेंट सबसे ज्यादा रहता है। जिसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत बाघों के प्रजनन और आवास के लिए पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाता है। बाघों के संरक्षण और उनके प्रजनन के लिए बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप (गतिविधि) के रखा जाता है। अलवर के सरिस्का में पहले टहला का क्षेत्र सीटीएच में था, उसे अब सीटीएच से बाहर करने का प्लान बनाया है। इसका विरोध हो रहा है। वहीं, जंगल के दूसरी तरफ के एरिया को सीटीएच में जोड़ा गया है, जो पहले सीटीएच से बाहर था। इस कारण सीटीएच का दोनों तरफ से विरोध है।
