अनाज मंडियों में गेहूं खरीद व्यवस्था में बदलाव और निजी कंपनियों को ब्लॉक आवंटन के विरोध में मजदूर संगठनों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। बुधवार को भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) ने कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया और सभा आयोजित की। संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा, जिसमें गेहूं खरीद की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई। सीटू ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो मंडियों का कामकाज ठप कर दिया जाएगा। माकपा नेता रामेश्वर वर्मा ने बताया कि सरकार मंडियों में ‘हरियाणा-पंजाब मॉडल’ लागू करने के नाम पर सरकारी खरीद में निजी कंपनियों को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के बराबर ब्लॉक आवंटित कर रही है। गेहूं की हैंडलिंग का कार्य भी व्यापारियों को देने का निर्णय लिया गया है, जिससे हजारों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। जिले की विभिन्न मंडियों में खरीद के लिए कंपनियों को ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं। हनुमानगढ़ टाउन और जंक्शन मंडी में पांच-पांच ब्लॉक दिए गए हैं, जबकि संगरिया, टिब्बी, गोलूवाला, रावतसर और पीलीबंगा में तीन-तीन ब्लॉक आवंटित किए गए हैं। मजदूर नेताओं का कहना है कि यह कदम मंडी व्यवस्था को धीरे-धीरे कमजोर करेगा और एफसीआई की भूमिका समाप्त करने का प्रयास है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राजस्थान में अधिकांश खरीद शहरी मंडियों में होती है, लेकिन फोकल प्वाइंट पर न तो पक्के प्लेटफॉर्म हैं और न ही शेड की पर्याप्त व्यवस्था। इससे किसानों की फसल खराब होने का खतरा बना रहता है। मजदूर संगठनों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें लेबर कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को खत्म करना, गेहूं की खरीद एफसीआई से करवाना, निजी कंपनियों को हटाना, मजदूरों के लिए ईपीएफ-ईएसआईसी लागू करना, बैग भराई का वजन 50 किलो तय करना और मंडियों में पेयजल, शौचालय व विश्राम गृह जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। संगठन ने दोहराया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो मंडियों को ठप कर एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
