लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 169 दिन (27 सितंबर 2025 से 14 मार्च 2026) जोधपुर सेंट्रल जेल में रहे। जेल में रहते हुए वांगचुक ने एक किताब लिखना शुरू किया था। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि वांगचुक जेल के अपने अनुभव पर जो किताब लिख रहे हैं, उसका शीर्षक (नाम) ‘Forever Positive’ हो सकता है। जेल में वांगचुक ने कई किताबें पढ़ी। इनमें श्री अरविंदो की ‘Tales of Prison Life’ भी शामिल थी। वांगचुक को जेल में एकांत कारावास में रखा गया था। कैदी या बंदी तो दूर उनसे जेल का सामान्य स्टाफ भी नहीं मिल सकता था। बैरक में चींटियों को ही उन्होंने साथी बना लिया था। चींटियां उन्हें लद्दाख के संघर्ष की याद दिलाती थी। वे सोचते थे कि नन्ही चींटियां मिलकर भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकती हैं। गीतांजलि जेल में वांगचुक से मिलने के बाद उनकी बात सोशल मीडिया के जरिए लोगों के सामने रखती थी। भास्कर रिपोर्ट में पढ़िए वांगचुक ने जेल में 169 दिन में क्या किया- 1. सामान्य कोठरी और कंबल सोनम वांगचुक जोधपुर सेंट्रल जेल के एकांत हिस्से में बनी सामान्य कोठरी में थे। इस कोठरी में न बिस्तर था और न फर्नीचर। फर्श पर बिछाने के लिए केवल कंबल दिया गया था। वांगचुक के पास न घड़ी थी, न किसी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण थे। वांगचुक का सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम उनकी पत्नी गीतांजलि थी। जेल के बाहर वह अपनी बात रखती थी। वहीं वांगचुक से मिलने कई बार जेल भी आई थी। एक बार जब गीतांजलि जेल में वांगचुक से मिलने आई थी, तब वांगचुक ने सनडायल यानी धूप घड़ी पर किताबें लाने को कहा था। ताकि बिना घड़ी के समय का अंदाजा लगाया जा सके। 2. श्री अरविंदो की किताब पढ़ी गीतांजलि ने जानबूझकर वांगचुक को सबसे पहले श्री अरविंदो की किताब ‘Tales of Prison Life’ दी थी। यह किताब अरविंदो के अलीपुर जेल में एक साल की कैद का आंखों देखा ब्योरा है। गीतांजलि ने बताया था कि यह किताब इसलिए दी, ताकि वांगचुक को यह एहसास हो कि अरविंदो जैसे महान व्यक्तित्व भी जेल गए थे। उन्होंने (अरविंदो ) वह अनुभव आत्मशक्ति से झेला। वांगचुक ने रिचर्ड बाख की किताब ‘Jonathan Livingston Seagull’ भी पढ़ी थी। यह किताब सीमाओं से परे जाकर जीने की प्रेरणा देती है। 3. चींटियों को देखकर हुई जिज्ञासा एकांत कारावास में जब बाहरी दुनिया से हर संपर्क कट गया, तब वांगचुक ने अपनी कोठरी के फर्श पर रेंगती चींटियों में एक नई दुनिया खोज ली थी। चींटियों के अनुशासन और एकजुटता को देखकर उनके मन में इन जीवों के प्रति वैज्ञानिक जिज्ञासा जागने लगी थी। इसके बाद उन्होंने पत्नी से Eleanor Spicer Rice और Eduard Florin Niga की किताब ‘Ants: Workers of the World’ मंगवाई, जो उनके बड़े भाई ने तोहफे के रूप में भेजी थी। इस किताब और चींटियों के अवलोकन ने उन्हें लद्दाख के संघर्ष की याद दिलाई। 4. थर्मामीटर की मांग: जेल की बैरकों को बेहतर बनाने का प्लान जनवरी 2026 में पत्नी गीतांजलि ने वांगचुक से मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उन्होंने बताया था कि वांगचुक ने जेल प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि उन्हें थर्मामीटर जैसे उपकरण मुहैया कराए जाएं। वांगचुक का इरादा था कि थर्मामीटर की मदद से जेल की बैरकों में तापमान का अध्ययन कर इको-रिस्पॉन्सिव आर्किटेक्चर यानी प्राकृतिक तरीके से बैरकों को गर्मी-सर्दी में बेहतर बनाने पर प्रयोग कर सके। यह मांग उनके इंजीनियर और पर्यावरणविद् स्वभाव की झलक थी। 5. लैपटॉप: इंटरनेट नहीं, NSA के वीडियो देखने के लिए मिला जेल में सोनम वांगचुक को 5 अक्टूबर 2025 को एक लैपटॉप दिया गया था। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि जेल में इसका कोई प्रावधान नहीं होने के बावजूद वांगचुक के अनुरोध पर यह दिया गया। इसका उद्देश्य यह था कि डीआईजी लद्दाख के माध्यम से भेजी गई एक पेन ड्राइव में NSA के तहत हिरासत के आधार बनाए गए 23 वीडियो थे, जिन्हें वांगचुक देख सके। लैपटॉप पर इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं थी। इस मामले में एक कानूनी विवाद भी उत्पन्न हुआ था। वांगचुक ने सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि पेन ड्राइव में से चार ऐसे अहम वीडियो गायब थे, जो उनके खिलाफ हिरासत का मुख्य आधार बताए गए थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया था।
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