भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का ‘जन आक्रोश जन संघर्ष जत्था’ डूंगरपुर पहुंचा। इस दौरान माकपा नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। करात ने आरोप लगाया कि सरकार देश के संसाधनों का उपयोग जनता के बजाय बड़े उद्योगपतियों के हित में कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान नीतियों के कारण देश के प्राकृतिक संसाधन निजी कंपनियों को सौंपे जा रहे हैं, जिससे आम जनता, विशेषकर आदिवासी, किसान और मजदूरों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं। वृंदा करात ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां अडानी और अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की अनदेखी कर बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। साथ ही, कई कानूनों और नियमों में बदलाव कर संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। करात ने मजदूरों और गरीबों के हित में बनाए गए रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को भी लगातार कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बजट में कटौती कर इसे लगभग समाप्त करने की स्थिति में ला दिया गया है। उनके अनुसार, ऐसे निर्णय संसदीय प्रक्रियाओं और संसदीय स्थायी समिति से पर्याप्त चर्चा के बिना लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश में किसान, मजदूर और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए वामपंथी दल संघर्ष तेज कर रहे हैं। इसी क्रम में 24 मार्च को दिल्ली में देशभर के किसान और मजदूरों की एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर सांसद अमराराम ने जानकारी दी कि प्रदेश के 10 जिलों में ‘जनाक्रोश और जनसंघर्ष जत्था यात्रा’ चल रही है। यह जत्था विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए डूंगरपुर पहुंचा है और अगले तीन दिनों तक आदिवासी क्षेत्रों में लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनेगा, साथ ही समाधान के लिए आंदोलन को मजबूत करेगा। इस दौरान गौतम डामोर, भूपेश कटारा और अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
