राजकीय मेडिकल कॉलेज (GMC) झुंझुनूं में प्रधानाचार्य द्वारा पिछले छह महीनों में छह विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदनाम (Designation) विलोपित करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। चिकित्सकों के संगठन अरिसदा (ARISDA) ने इसे प्रधानाचार्य की ‘तानाशाही’ और ‘द्वेषपूर्ण’ कार्रवाई बताते हुए मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। चिकित्सकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पदनाम बहाल नहीं किए गए और प्रधानाचार्य पर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। नियमों को ताक पर रखकर की गई कार्रवाई ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि प्रधानाचार्य ने राजस्थान सेवा नियमों (RSR) और स्थापित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया है। किसी भी कार्मिक पर कार्रवाई से पूर्व नोटिस देना, जवाब सुनना और सक्षम स्तर (सरकार) से अनुमोदन लेना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। चिकित्सकों के मुख्य तर्क न कोई नोटिस दिया गया, न ही पक्ष रखने का अवसर। त्यागपत्र दे चुके और सेवानिवृत्त हो चुके चिकित्सकों के पदनाम अब तक विलोपित नहीं हुए, जबकि निरंतर सेवा दे रहे कर्मठ डॉक्टरों को निशाना बनाया गया। बिना पीएमओ (PMO) की जानकारी और बिना प्रशासनिक स्वीकृति के एकतरफा आदेश जारी किए गए। NMC की मान्यता पर मंडराया संकट सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि फार्माकोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में केवल पदनामित (Designated) चिकित्सक ही कार्यरत थे। उनके पदनाम विलोपित होने से अब इन विभागों में फैकल्टी की संख्या ‘शून्य’ हो गई है। व्यवस्था को संभाले हुए हैं पदनामित चिकित्सक ज्ञापन में बताया गया कि पिछले 13 दिनों से राजमेस (RajMES) द्वारा सीधे पदस्थापित शिक्षक आपातकालीन सेवाओं (Emergency Duty) का बहिष्कार कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में भी ये पदनामित चिकित्सक ही ओपीडी, आईपीडी, पोस्टमार्टम, जेल ड्यूटी और राष्ट्रीय कार्यक्रमों का संचालन कर आमजन को सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके साथ ‘बर्बरतापूर्ण’ व्यवहार किया जा रहा है। प्रमुख मांगें
पदनाम से विलोपित किए गए सभी 6 चिकित्सकों को तत्काल बहाल किया जाए। नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले और ‘अनुभवहीन’ प्रधानाचार्य के खिलाफ जांच कर सख्त कदम उठाए जाएं। कॉलेज की गरिमा और कार्यसंस्कृति को बचाने के लिए वर्तमान प्रधानाचार्य को पद से हटाया जाए।