जिला मुख्यालय से महज 45 किमी दूर भंवरगढ़ से नाहरगढ़ मार्ग पर कपिलधारा गौमुख के समीप स्थित त्रिपोलिया का छज्जा दुर्लभ पुरातात्विक स्थल पर रॉक पेंटिंग खतरे में है। यहां बड़ी संख्या में मधुमक्खी के छत्त हैं उनसे शहद के लालच में लाेग इसमें सूखे पेड़ डालकर आग ही लगा देते है। ऐसे में यहां व आसपास मौजूद 3 से 4 हजार साल पुरानी रॉक पेंटिंग को नुकसान पहुंच रहा है। असामाजिक तत्व यहां की दीवारों और पेंटिंग को खराब कर रहे हैं। विरासत के संरक्षण के लिए यहां सुरक्षा दीवारें, बोर्ड और गाइड होने चाहिए थे पर कोई व्यवस्था नहीं है। इससे छज्जा की चट्टानों व प्राचीन चित्रों की ये विरासत समाप्त होती जा रही है। “साल 1981 में कपिलधारा, कन्या दह में एएसआई के ग्रुप ने सर्वे किया था। ताम्रशकाल की रॉक पेंटिंग मिली। यह करीब 4 से 5 हजार साल पुरानी है। कपिलधारा में रॉक पेंटिंग है।” – नारायण व्यास, तत्कालीन असिस्टेंट सुपरिडेंट, एएसआई दुर्लभ है यह छज्जा, यहां आदि मानव के निवास स्थल के भी पुख्ता प्रमाण कपिलधारा से करीब 500 मीटर दूर त्रिपोलिया का छज्जा बरनी नदी के किनारे स्थित है। यहां प्राकृतिक गुफा में 8 से 10 फीट चौड़ाई और 10 से 12 फीट ऊंचाई के तीन दरवाजे बने हैं। यहां आदिमानव के निवास स्थल के पुख्ता प्रमाण है। यह करीब 5 हजार साल पुराने हैं। रॉक पेंटिंग अत्यंत दुर्लभ है। छज्जा और आसपास का इलाका प्रागैतिहासिक कला का महत्वपूर्ण केंद्र है। भास्कर एक्सपर्ट- – हंसराज नागर, शोधार्थी “त्रिपोलिया के छज्जा में आगजनी की घटना को दिखवाकर कार्रवाई के निर्देश रेंजर को दिए हैं।” – विवेकानंद माणिकराव बड़े, उप वन संरक्षक, बारां
