टोंक जिले में पुलिस ने राज्य स्तरीय साइबर ठगी गिरोह का बड़ा खुलासा किया है। 22 राज्यों में फैले इस गिरोह ने अब तक 10 से 12 करोड़ रुपए की साइबर ठगी को अंजाम दिया है। टोंक एसपी राजेश कुमार मीणा के निर्देशन में गठित जिला स्पेशल टीम (SIT) ने दो शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार कर उनके नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने एक लाख रुपए नकद, एक थार कार और करीब पांच लाख रुपए की लागत के पांच मोबाइल फोन जब्त किए हैं। 404 शिकायतें पहले से दर्ज, 22 राज्यों में फैला नेटवर्क पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर पहले से ही 404 शिकायतें दर्ज हैं। अब तक करीब 2 करोड़ 49 लाख रुपए की ठगी की पुष्टि हो चुकी है, जबकि पूछताछ में आरोपियों ने 10 से 12 करोड़ रुपए तक की साइबर ठगी करना स्वीकार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने देश के 22 राज्यों में सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया। ठगी का यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। फर्जी सिम और ट्रेड लिंक से करते थे ठगी जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग राज्यों की फर्जी सिम का इस्तेमाल कर साइबर ठगी को अंजाम देते थे। पुलिस ने खुलासा किया है कि गिरोह द्वारा कुल 82 फर्जी सिम कार्ड का उपयोग किया गया। आरोपी लोगों को फर्जी ट्रेडिंग लिंक भेजकर निवेश के नाम पर झांसे में लेते थे और फिर उनके खातों से रकम साफ कर देते थे। इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी पुलिस ने इस मामले में रामवतार उर्फ राज (26) पुत्र बद्री लाल, हंसराज (28) पुत्र रतन लाल को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी साइबर फ्रॉड के पुराने खिलाड़ी बताए जा रहे हैं और इनके मोबाइल से कई अहम डिजिटल सबूत भी मिले हैं। दूनी थाना इलाके में की गई कार्रवाई कार्रवाई टोंक एसपी राजेश कुमार मीणा के निर्देशन में, मालपुरा एएसपी पुष्पेंद्र सिंह और देवली डीएसपी हेमराज चौधरी के सुपरविजन में थाना दूनी क्षेत्र में की गई। जिला स्पेशल टीम के प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी के नेतृत्व में टीम ने यह सफलता हासिल की। पूरे गिरोह तक पहुंचने की तैयारी पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। साइबर ठगी से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, सिम सप्लायर और अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।
