ऊपर की इस तस्वीर को गौर से देखिए। यह पाली जिले के रोहट इलाके की राखी (बदला हुआ नाम) है। 15 साल की राखी के पैरों में जंजीर है। यह जंजीर किसी और ने नहीं, बल्कि इसके माता-पिता ने डाला है। उन्हें आशंका है कि जंजीर खोल देने पर वह (राखी) किसी न किसी को नुकसान पहुंचा देगी। इसकी इस हालत का जिम्मेदार ‘अपने’ ही हैं। चाचा के परिवार से हुए जमीनी विवाद में किसी इस मासूम के सिर पर लाठी दे मारी। इसके बाद इसकी तबीयत बिगड़ी और आज हालात यह बन गए हैं। बिना बताए कहीं चली जाती है
हमेशा गुमसुम रहती है। बिना बताए कहीं भी चली जाती है। घर में माता-पिता परेशान होते रहते हैं। कभी खुद के तो कभी पड़ोसियों के कपड़े फाड़ देती है। इसी से बचने के लिए परिवार वाले जंजीर में बांधकर रखते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम हॉस्पिटल लेकर आई
अब एक ही पलंग के आस-पास उसकी जिंदगी गुजर रही थी। खाना-पीना सबकुछ वहीं हो रहा था। सोशल मीडिया पर इसके फोटो-वीडियो सामने आए तो CMHO डॉ. विकास मारवाल ने टीम भेजी और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले कर आए। डॉक्टर बताते हैं- ये ‘साइकोसिस डिसऑर्डर’ है। अब बच्ची का इलाज किया जाएगा। वीडियो देख CMHO ने भेजी टीम
पाली CMHO विकास मारवाल के पास सोशल मीडिया के जरिए एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में जंजीरों में जकड़ी राखी को देखा तो उन्होंने डिप्टी CMHO डॉ. वेदांत गर्ग को मौके पर भेजा। डॉ. गर्ग ने उसके परिजनों से सारी कहानी सुनी। इसके बाद एम्बुलेंस बुलाई गई और राखी को इलाज के लिए शनिवार शाम को पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लाया गया। यहां मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दलजीत सिंह राणावत ने राखी के सेहत की जांच करने के बाद इलाज शुरू किया है। चाचा के परिवार ने किया हमला
राखी के पिता बताते हैं- वे पहले पाली के ही दूसरे गांव में रहते थे। खेतों में कोयला बनाने और फसलों की रखवाली करते थे। 8 महीने पहले अपने मूल गांव में परिवार सहित आकर रहने लगे। यहां खेत और मकान में उनका भी हिस्सा है। चाचा का परिवार वह हिस्सा हमें नहीं देना चाहता था। 3 महीने पहले चाचा के परिवार ने हमारे पूरे परिवार पर हमला कर दिया। इस हमले में बेटी के सिर पर भी लाठी का वार किया। इस घटना के बाद से ही उसकी स्थिति बिगड़ने लगी। कभी चुपचाप बैठी रहती तो कभी बिना बताए घर से निकल जाती। कभी खुद के, कभी महिलाओं के कपड़े फाड़ देती
पिता बताते हैं- हम जोधपुर ले गए, जहां इलाज करवाया। पिछले एक महीने से इसकी तबीयत ज्यादा खराब रहने लगी। बिना बताए घर से निकल जाती है। कभी खुद के पूरे कपड़े तो कभी गांव की महिलाओं पर हमला कर उनके कपड़े फाड़ देती। मिट्टी और सीमेंट तक खा लेती थी। इसका खुद पर कंट्रोल नहीं था। इसलिए मजबूरी में इसे जंजीर से बांधकर रखते थे ताकि यह खुद किसी हादसे का शिकार न हो और न किसी दूसरे पर हमला करे। साइकोसिस डिसऑर्डर से पीड़ित
पाली के बांगड़ हॉस्पिटल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर दलजीत सिंह राणावत ने बताया- पीड़िता साइकोसिस डिसऑर्डर से पीड़ित है। मारपीट में सिर में चोट लगने और सदमा लगने से इसे नींद आनी कम हो गई। इससे साइकोसिस डिसऑर्डर बीमारी की चपेट में आ गई। इस बीमारी में मरीज, सही और गलत के बीच फर्क नहीं कर पाता है। उसे अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देती और दिखाई देती हैं, जो वास्तविक नहीं होती हैं। मरीज को समझ नहीं पाता है परिवार
डॉ. राणावत ने बताया कि इसके साथ-साथ, साइकोसिस डिसऑर्डर का मरीज डिफ्यूजन या हैलूसिनेशन जैसी चीजों में फंसा हुआ होता है। ये दोनों ही ऐसी स्थिति है, जिसमें मरीज अलग-अलग तरह की चीजों का अनुभव करता है, जो उसके मन का वहम हो सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज इसी कंफ्यूजन में रहता है कि उसके घर-परिवार वाले उसे समझने की कोशिश नहीं करते हैं। अजीब-अजीब हरकतें करता है। इसका इलाज संभव है।