अलवर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष की ओर से मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में आपसी समझौते के बाद बीमा कंपनी से प्राथीर् को एक करोड़ 6 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि का चेक दिलाया गया। पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है। न्यायाधीश अनु चौधरी की ओर से पक्षकारों को समझाइश कर आपसी सहमति कराने में प्रमुख भूमिका निभाई। जिसके परिणामस्वरूप पीड़ित परिवार को आर्थिक राहत प्राप्त हो सकी। प्राधिकरण सचिव मोहन लाल सोनी ने बताया कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के समक्ष रेखा बनाम शेर सिंह शीर्षक से क्लेम याचिका प्रस्तुत की गई थी। याचिका में उल्लेख किया गया कि प्रार्थी रेखा के पति रविकांत शर्मा 27 सितम्बर 2024 को अपनी मोटरसाइकिल से मंडी मोड़ स्थित अपने घर जा रहे थे। रात्रि लगभग 9 बजे कृषि उपज मंडी के पीछे सेठ हर प्रसाद धर्मशाला के सामने पहुंचे। तभी सामने से आ रही मोटरसाइकिल के चालक ने तेज गति एवं लापरवाही से वाहन चलाते हुए टक्कर मार दी। गंभीर चोट के कारण रविकांत शर्मा की मौत हो गई। क्लेम याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि मृतक जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कार्यालय AEN इंजीनियर सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। प्रार्थी द्वारा बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेन्स कंपनी से कुल 2,16,10,000 रुपए की क्षतिपूर्ति राशि दिलाए जाने का दावा प्रस्तुत किया गया था। लोक अदालत की भावना के अनुरूप पक्षकारों को समझाइश दी गई, जिसके परिणाम बीमा कंपनी एवं प्रार्थी के मध्य आपसी सहमति से 1 करोड़ 6 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि पर राजीनामा तय हुआ। इस अवसर पर प्रार्थी के अधिवक्ता जय कृष्ण गुप्ता भी उपस्थित रहे। समझौता राजीनामा प्रस्तुत होने के बाद जिला एव सेशन न्यायाधीश अनंत भंडारी द्वारा बीमा कंपनी की ओर से प्रस्तुत 1.06 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति राशि का चेक प्रार्थी एवं उनके वारिसों को सुपुर्द किया गया। बीमा कंपनी के अधिवक्ता सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि मोटर वाहन दुर्घटना से संबंधित प्रकरणों की एक विशेष सूची तैयार कर आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकाधिक मामलों का निस्तारण कराने का प्रयास किया जा रहा है।
अध्यक्ष अनंत भंडारी ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों का आपसी सहमति से निस्तारण होने से पीड़ित परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता मिल जाती है।
