स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाने की दिशा में जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में आयोजित नेशनल हेल्थकेयर हैकाथॉन 2.0 में देशभर से आए छात्रों ने 36 घंटे तक लगातार काम करते हुए अस्पतालों के लिए कई स्मार्ट और उपयोगी तकनीकी समाधान तैयार किए। चिकित्सा क्षेत्र की जटिल चुनौतियों पर आधारित इन मॉडलों को विशेषज्ञों ने भविष्य के लिए बेहद उपयोगी बताया। हैकाथॉन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. (मेजर जनरल) सुभाष पारीक ने चिकित्सा और इंजीनियरिंग के मजबूत संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि जीवन बचाने के लिए इन दोनों क्षेत्रों का समन्वय और निरंतर नवाचार देश की प्रगति का आधार है। वहीं डॉ. बुधादित्य चक्रवर्ती, डायरेक्टर एवं हेड ऑफ कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, आरएचएल हार्ट सेंटर ने एआई के दौर में मूलभूत सिद्धांतों की समझ और मानवीय बुद्धिमत्ता को बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि तकनीक का सही और प्रभावी उपयोग किया जा सके। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने कहा कि यह हैकाथॉन नवाचार और सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम बन रहा है। यहां से निकलने वाले स्टार्टअप स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवा अब आईसीयू और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक समाधान खोज रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यूनिवर्सिटी और प्रस्तावित जेईसीआरसी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (जेएमसीएचआरसी) अपनी एआई लैब्स के माध्यम से ऐसे नवाचारों को आगे बढ़ाने में सहयोग देगा। डायरेक्टर (डिजिटल स्ट्रेटेजीज) धीमंत अग्रवाल ने छात्रों के नए विचारों को प्रोत्साहित करने के लिए 5 योग्य टीमों को बिना किसी इक्विटी के कुल 10 लाख रुपये के सीड फंड देने की घोषणा की। वहीं वाइस चांसलर प्रो. विक्टर गंभीर ने कहा कि हैकाथॉन में विकसित सभी प्रोजेक्ट्स को जेईसीआरसी इनक्यूबेशन सेंटर का पूरा सहयोग मिलेगा और इन इनोवेशन से जुड़े पेटेंट का पूरा खर्च विश्वविद्यालय द्वारा वहन किया जाएगा। इस हैकाथॉन की थीम ‘एआई-पावर्ड क्लीनिकल एक्सीलेंस’ रही। प्रतियोगिता में शीर्ष तीन टीमों को क्रमशः 75,000, 50,000 और 25,000 रुपये के नकद पुरस्कार दिए गए। प्रतियोगिता में ‘टीम सहाय’ ने पहला स्थान हासिल किया। टीम ने एआई आधारित पेशेंट फॉल रिस्क प्रिडिक्शन सिस्टम विकसित किया है, जो एक आईओटी आधारित वेस्ट बैंड के माध्यम से काम करता है। यह डिवाइस मरीज की गतिविधियों पर नजर रखता है और गिरने की संभावना का पहले ही अनुमान लगाकर स्वास्थ्यकर्मियों को सतर्क कर देता है, जिससे संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इसके अलावा अन्य टीमों ने स्मार्ट फार्मेसी इन्वेंटरी सिस्टम (जो दवाइयों के प्रबंधन को एआई के माध्यम से अधिक सटीक बनाता है) और हॉस्पिटल रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन सिस्टम (अस्पताल के संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए) जैसे नवाचारी समाधान प्रस्तुत किए। हैकाथॉन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 10 अन्य टीमों को प्रोत्साहन स्वरूप 2100 रुपये के सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किए गए। आगे पढ़ें जयपुर की अन्य खबरें…