कहा- गलत तरीके से क्लेम खारिज किया फैमिली हेल्थ पॉलिसी होते हुए भी बीमित को इलाज खर्च राशि का भुगतान नहीं करने को जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर- प्रथम ने सेवादोष माना है। वहीं गलत तरीके से प्रार्थियों का क्लेम खारिज करने पर बीमा कंपनी आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी पर एक लाख रुपए हर्जाना लगाया। साथ ही बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह मृतका की कैंसर बीमारी पर खर्च हुए 21,14,364 रुपए 9 फीसदी ब्याज सहित परिवादी पक्ष को दे। आयोग के अध्यक्ष डॉ. सूबेसिंह यादव, सदस्या हेमलता अग्रवाल व आशुतोष कुमार ने यह आदेश राहुल माथुर व अन्य के परिवाद पर दिया। अधिवक्ता बंशीधर बड़ाया ने बताया कि आयोग ने विपक्षी बीमा कंपनी की यह दलील नहीं मानी कि परिवादिया मृतका उदिता माथुर को उसकी कैंसर बीमारी का पता पहले से था। आयोग ने कहा कि परिवादिया को स्तन कैंसर बीमारी का पहली बार 28 जून 2023 को पता चला था। उनकी पॉलिसी 29 सितंबर 2019 से जारी थी। टॉप अप बीमा योजना, सुपर हैल्थ प्लस में उसके पास 50 लाख रुपए तक का कवर था। बीमा कंपनी इलाज पर खर्च राशि देने से मना नहीं कर सकती। कैंसर के इलाज के दौरान प|ी की हुई मौत, पति-बेटी ने क्लेम के लिए की थी अपील परिवादिया उदिता ने विपक्षी कंपनी से खुद, पति व बेटी के लिए 29 सितंबर 2019 को फैमिली मेडिकल एंड हैल्थ पॉलिसी ली, लेकिन परिवादीगण ने इस पॉलिसी पर कोई क्लेम नहीं लिया। इस दौरान प्लेटिनम योजना में पॉलिसी का नवीनीकरण हुआ। इसकी अवधि 27 सितंबर 2023 से 26 सितंबर 2026 तक थी। परिवादिया ने पॉलिसी का 50 लाख रुपए तक का टॉपअप कवर करवा लिया। इस दौरान 24 जून 2023 को परिवादिया को स्तन में सूजन व दर्द की शिकायत हुई। उसे तत्काल मेदांता अस्पताल के डॉक्टर को दिखाया। वहां उसकी बायोप्सी सहित अन्य जांच हुई और 28 जून की रिपोर्ट में स्तन कैंसर की बीमारी का पता चला। उसकी कीमोथैरेपी और सर्जरी की। इस पर खर्च राशि के पुनर्भुगतान के लिए परिवादिया ने बीमा कंपनी के यहां क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने उसका क्लेम खारिज कर दिया कि उसे बीमारी का पता पहले से था, उसने यह तथ्य छिपाया है। इसे परिवादिया ने उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी। मामला लंबित रहने के दौरान उसकी मौत हो गई और उसके पति व बेटी मामले में पक्षकार बने।
