हिमाचल प्रदेश द्वारा लगाए गए एंट्री टैक्स के विरोध में पंजाब-हिमाचल सीमा पर विभिन्न संगठनों ने अपना संघर्ष तेज कर दिया है। इन संगठनों ने पंजाब सरकार से ‘रेसिप्रोकल टैक्स’ लागू करने और सीमावर्ती गांवों के निवासियों को टैक्स से छूट देने की मांग की है। इसी मुद्दे को लेकर 24 मार्च को सुबह घनौली-नालागढ़ हाईवे पर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शनकारी घनौली टी-प्वाइंट पर इकट्ठा होकर हिमाचल बैरियर की ओर मार्च करेंगे और हिमाचल सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन में किरती किसान मोर्चा के हरप्रीत सिंह भट्टो और जरनैल सिंह मग्रोड़ सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने सभी से इस आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है। ‘पारस्परिक टैक्स’ लागू करने की मांग ​ नेता गौरव राणा ने बताया कि ‘पारस्परिक टैक्स’ का अर्थ है कि यदि एक राज्य दूसरे राज्य के वाहनों से टैक्स वसूल करता है, तो दूसरा राज्य भी उसी अनुपात में पहले राज्य के वाहनों पर टैक्स लगाए। उनका कहना था कि यह नीति राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखती है और किसी एक पक्ष को नुकसान नहीं होता। लोगों की आजीविका पर पड़ेगा टैक्स का सीधा असर राणा ने यह भी मांग की कि सीमावर्ती गांवों के निवासियों को इस प्रकार के टैक्स से पूरी छूट दी जाए। उन्होंने तर्क दिया कि इन गांवों के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही दूसरे राज्य से जुड़ी होती है, और टैक्स का सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ता है। एंट्री टैक्स से पंजाब के व्यापारियों पर पड़ रहा बोझ नेताओं ने बताया कि हिमाचल सरकार के एंट्री टैक्स से पंजाब के व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इस मुद्दे पर पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान न निकलने के कारण संघर्ष को और तेज किया जा रहा है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि हिमाचल सरकार ने यह टैक्स वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।