राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर पुलिस की लापरवाही पर सोमवार को सख्त रुख अपनाते हुए फटकार लगाई। पुलिस ने याचिकाकर्ता की फॉर्च्यूनर गाड़ी केस में वांछित बताकर 8 महीने पहले पकड़ी और थाने में ले जाकर खड़ी कर दी। अब पुलिस न तो इस गाड़ी की जब्ती दिखा रही है और न ही वापस दे रही है। जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की एकलपीठ ने कोर्ट के सामने ही याचिकाकर्ता संपत पूनिया को उनकी फॉर्च्यूनर गाड़ी हैंडओवर ऑर्डर सौंपने का निर्देश दिया। जोधपुर पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताते हुए जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित ने कहा- गलत बात है, हाईकोर्ट के ऑर्डर के बावजूद भी दोबारा हाईकोर्ट…मतलब ही क्या है? बार-बार नोटिस देने के बावजूद… ये मिस्टेक सिपाही करे, तो समझ आता है, सीनियर ऑफिसर करे, बिल्कुल सही बात नहीं है… गाड़ी जब्त करनी या नहीं करनी। आपको करना है, कर लेते, किसने रोका?’ कोर्ट के आदेश की नहीं हो रही पालना
याचिकाकर्ता संपत पूनिया के वकील मोती सिंह ने पिटीशन दायर कर बताया कि हाईकोर्ट की समकक्ष पीठ ने 29 जुलाई 2025 को आदेश जारी किया था। इस आदेश में डीसीपी पश्चिम और थाना प्रभारी सरदारपुरा को आवेदन पत्र प्रस्तुत करने पर निस्तारण के निर्देश दिए थे।​ याचिकाकर्ता ने कोर्ट के आदेश के अनुसार 21 अगस्त को डीसीपी (पश्चिम) को आवेदन दिया था, लेकिन इस आदेश की पालना अभी तक नहीं की गई है। वकील ने कोर्ट को बताया- गाड़ी आज भी थाने में खड़ी है और उसमें तोड़फोड़ की जा रही है। बिना किसी आधार के गाड़ी को जब्त कर रखा है।​ डीसीपी और एसएचओ कोर्ट में हुए पेश
डीसीपी पश्चिम विनीत बंसल और सरदारपुरा थाने के एसएचओ जयकिशन सोमवार को कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 15 नवंबर को गाड़ी को रिलीज करने के बारे में आदेश जारी कर दिया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया- पुलिस ने आज तक उन्हें गाड़ी नहीं सौंपी है। यह सुनकर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।​ उस आदेश की प्रति याचिकाकर्ता के वकील को दिलाई।​ जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित ने आदेश में कहा- पुलिस अधिकारियों को हिदायत दी जाती है कि वे याचिकाकर्ता को थाने में रखी गाड़ी हैंडओवर करें। इसके बाद याचिकाकर्ता ने कहा- मंगलवार को सरदारपुरा थाने जाऊंगा। रिलीज ऑर्डर मिला हुआ है। करीब दो साल पुराने केस का बहाना
जोधपुर के शोभावतों की ढाणी निवासी प्रेम कुमार ने चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में FIR संख्या 38/24 दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि कैलाश पंचारिया, संपत पूनिया और अन्य 7-8 लोगों ने 16 जनवरी 2024 को उनके खेत पर जेसीबी मशीन से जबरदस्ती अवैध कब्जा कर लिया था।​ उस शिकायतकर्ता के अनुसार 25 जनवरी 2024 की देर रात 2 गाड़ियों में आकर उनके भाई, मां और पत्नी के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। आरोप था कि फॉर्च्यूनर गाड़ी से कुचलने की कोशिश की गई और पत्थरबाजी की गई। इस पर एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।​ सरदारपुरा थाने के थानाधिकारी की ओर से कोर्ट में पेश तथ्यात्मक रिपोर्ट के अनुसार चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में दर्ज उस FIR की जांच चल रही है। यह जांच एसीपी (प्रतापनगर) कर रहे हैं। गाड़ी के मालिक संपत राज पूनिया और उनकी गाड़ी उस मामले में वांछित बताई गई थी।​ उसी मामले में हाईकोर्ट ने संपत राज पूनिया की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है। पुलिस की रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि गाड़ी को सबूत के तौर पर जब्त करना अभी बाकी था, इसलिए पुलिस ने गाड़ी को जब्त नहीं किया और थाने में खड़ा रखा था।​ कोर्ट ने पिछली सुनवाई में दिए थे निर्देश
पुलिस ने अप्रेल 2025 में फॉर्च्यूनर गाड़ी पकड़ी थी और तब से वह सरदारपुरा थाने में खड़ी है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि थाने में खड़ी गाड़ी में तोड़फोड़ हो रही है। पुलिस न तो वाहन की जब्ती दिखा रही है और न ही वापस दे रही है।​ हाल ही में 12 नवंबर को भी हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की थी, तब जस्टिस पुरोहित ने सरकारी वकील को साफ निर्देश दिया था कि अगली सुनवाई में डीसीपी (पश्चिम) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रखें, ताकि उचित फैसला लिया जा सके।​ मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें बिना जब्त किए थाने में खड़ी की फॉर्च्यूनर:डीसीपी हाईकोर्ट में तलब, याचिकाकर्ता बोला- तोड़फोड़ की राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना जब्त किए पकड़ी गाड़ी वापस नहीं करने के मामले में पुलिस की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच के जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित ने जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के उपायुक्त (पश्चिम) को 17 नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है। (पूरी खबर पढ़ें)