राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने नीट पीजी 2025 में एमडी कोर्स में प्रवेश से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की अधिसूचना और PGMER-2000 से मिलकर बने वैधानिक ढांचे को काउंसलिंग के किसी ‘इंफॉर्मेशन बुलेटिन’ के जरिए कमजोर या कठोर नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने जोधपुर की डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज द्वारा एक छात्रा का प्रवेश निरस्त करने वाले आदेश को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है और याचिकाकर्ता को सात दिन के भीतर प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। प्रवेश रोके जाने के पीछे का घटनाक्रम कोटा निवासी डॉ. पर्णिका शर्मा ने एडवोकेट यशपाल खिलेरी के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि शर्मा ने साल 2023 में छत्तीसगढ़ से एमबीबीएस पूरी की थी और 25 अगस्त 2023 को वहां की मेडिकल काउंसिल से ‘प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन’ प्राप्त किया था। इंटर्नशिप पूरी करने के बाद वह राज्य के बांड नियमों के तहत 24 अगस्त 2024 से बस्तर के एक सरकारी अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। डॉ. शर्मा ने नीट पीजी-2025 परीक्षा में 800 में से 472 अंक प्राप्त कर 33498वीं रैंक हासिल की थी। काउंसलिंग के दौरान 23 फरवरी 2026 को उन्हें डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज, जोधपुर में एमडी (एनेस्थीसिओलॉजी) कोर्स आवंटित किया गया। लेकिन 27 फरवरी को रिपोर्टिंग के समय उनके पास छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल का स्थायी पंजीकरण प्रमाण पत्र मूल रूप में नहीं होने के कारण, कॉलेज प्रशासन ने 28 फरवरी को आदेश जारी कर उन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया। नियमों में एक महीने की छूट, फिर भी रद्द किया एडमिशन याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि NMC की 29 दिसंबर 2023 की अधिसूचना के क्लॉज 4.1 के अनुसार, जब तक नेक्स्ट (National Exit Test) लागू नहीं होता, तब तक पीजी प्रवेश पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन, 2000 के तहत ही होंगे। इन वैधानिक रेगुलेशन के नियम 8(3) के तहत उम्मीदवार को प्रवेश की तारीख से एक महीने के भीतर स्थायी पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त करने की छूट दी गई है। वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि याचिकाकर्ता के पास पहले से प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन था और याचिका लंबित रहने के दौरान 9 मार्च 2026 को उन्हें स्थायी पंजीकरण प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि नीट-पीजी 2025 के सूचना बुलेटिन के क्लॉज 4.6 के अनुसार, रिपोर्टिंग के समय स्थायी पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना जरूरी था। ये दस्तावेज न होने के कारण प्रवेश रद्द करने का निर्णय सही था। कोर्ट की टिप्पणियां: बुलेटिन नियमों का स्थान नहीं ले सकता हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में NMC अधिसूचना और PGMER-2000 के नियम को एक साथ पढ़ते हुए संपूर्ण वैधानिक ढांचे को स्पष्ट किया। कोर्ट ने पाया कि यह वैधानिक ढांचा एडमिशन के समय स्थायी पंजीकरण को जरूरी नहीं बनाता, बल्कि इसके लिए स्पष्ट रूप से एक महीने का समय देता है। कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत प्रतिपादित करते हुए लिखा, “यह कानून का एक सुस्थापित सिद्धांत है कि प्रशासनिक निर्देश, दिशा-निर्देश या सूचना बुलेटिन वैधानिक नियमों को ‘ओवरराइड’ नहीं कर सकते, न ही उनका स्थान ले सकते हैं और न ही उनके अल्पीकरण (derogation) में हो सकते हैं। किसी भी विसंगति की स्थिति में, वैधानिक प्रावधान ही मान्य होंगे।” कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जब वैधानिक नियम स्थायी पंजीकरण प्राप्त करने के लिए एक महीने का समय देते हैं, तो प्रतिवादी एक ‘सूचना बुलेटिन’ के माध्यम से अधिक कठोर शर्त लगाकर उम्मीदवार के इस अधिकार को सीमित नहीं कर सकते। कोर्ट ने इसे मनमाना और नियमों के मूल उद्देश्य को विफल करने वाला माना, जिसके कारण एक मेधावी छात्रा को उसके अधिकार से वंचित होना पड़ा। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज, जोधपुर द्वारा 28 फरवरी को जारी किए गए प्रवेश निरस्तीकरण आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से सात दिन के भीतर याचिकाकर्ता को एम.डी. (एनेस्थीसिओलॉजी) कोर्स में प्रवेश दें।