पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट के चुनाव का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गया है। पूर्व सीनेटर हरप्रीत सिंह दुआ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याची समेत प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने मामले पर सख्त टिप्पणी भी की। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा- पंजाब विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था का चुनाव के लिए बलिदान नहीं दिया जा सकता। स्टूडेंट को पहले 7 दिन पढ़ाई करनी चाहिए। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई कर रही है। मामले में चीफ जस्टिस ने कहा, “हम एक शैक्षणिक संस्था की बात कर रहे हैं या राजनीतिक संस्था की?” कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा देना है और यह मकसद धीरे-धीरे पीछे छूटता दिखाई दे रहा है। अब पढ़िए हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में क्या कहा… याचिकाकर्ता की मामले में 3 बातें… केंद्र सरकार ने भंग किया था सीनेट
केंद्र सरकार की तरफ से 28 अक्तूबर को नोटीफिकेशन जारी कर सीनेट और सिंडिकेट को भंग कर दिया था। इसे लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों की तरफ से प्रदर्शन किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने अपने इस फैसले को वापस ले लिया, मगर अब छात्र संगठन जल्द से जल्द सीनेट चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से चुनाव का आश्वासन भी दिया गया है। लेकिन स्टूडेंट लिखित में जल्द चुनाव कराने की मांग पर अड़े हैं। इसी को लेकर तीन बार के सीनेटर हरप्रीत सिंह दुआ ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।