संगरिया. गांव शाहपीनी में शनिवार सुबह वह मंजर देख हर किसी की आंखें नम हो गईं, जब सड़क हादसे में जान गंवाने वाले लक्की [15] की अर्थी घर से उठी। जिस आंगन में दो भाइयों की चहकती आवाजें गूंजती थीं, वहां अब मातम पसरा था। मां-बाप की रुलाई थमने का नाम नहीं ले रही थी। परिवार के लिए यह दर्द इसलिए भी असहनीय था, क्योंकि एक दिन पहले छोटे बेटे अनमोल उर्फ मोले (10) का अंतिम संस्कार हुआ था। दोनों बेटों के एक साथ चले जाने से पिता का रो-रोकर बुरा हाल है कि उनकी हालत देख सांत्वना देने वाले की भी आंसू नहीं थमे।