राज्य सरकार ने बजट में घोषणाएं करके विकास के दावे तो किए, लेकिन धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें तो दो साल की करीब 13 बजट घोषणाएं अब तक पेंडिंग चल रही हैं। इक्का-दुक्का हैं, जिनमें काम शुरू हुआ है। बाकी सभी के प्रस्ताव जिला कलेक्टर से लेकर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की फाइलों में ही दफन होकर रह गए हैं। इधर आगामी बजट की तैयारी शुरू हो चुकी है। प्रभारी मंत्री एवं चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने हाल ही में नए प्रस्ताव मांगे हैं। पीबीएम में अल्ट्रा एडवांस्ड बर्न केयर सेंटर के बजट पर कैंची चल गई। स्पाइनल इंजरी सेंटर की घोषणा 2024-25 के बजट में हुई थी। बाद में इसे 2025-26 के बजट में भी शामिल कर लिया गया, लेकिन अब तक नहीं बना। इसी प्रकार भुजिया बाजार डिस्पेंसरी के लिए एक करोड़ और जिला अस्पताल में ड्रग स्टोर के एक करोड़ रुपए पश्चिम के विधायक ने सरकार से मांगे थे। दो साल बाद भी नहीं मिले। हालात यह हैं कि वर्ष 2025-26 की बजट घोषणाओं की क्रियान्विति तो दूर की बात है, 2024-25 की बजट घोषणाओं के काम ही अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। इसका मूल कारण फाइनेंस की स्वीकृति बताया जा रहा है। एसपी मेडिकल कॉलेज से प्रस्ताव बनाकर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय भेजे गए थे। वहां से वित्त विभाग को भेजे जाने हैं। यानी दो साल से पत्राचार के जरिए केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है। “नए बजट प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिए गए हैं। प्रभारी मंत्री को भी कॉपी दे दी गई है। पुराने लंबित बजट प्रस्तावों पर काम चल रहा है। बर्न यूनिट के लिए हमने पूरा पैसा मांगा है। जिला अस्पताल के काम पेंडिंग हैं। उनके लिए भी अलग से लिखा गया है।” — डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा,प्राचार्य, एसपी मेडिकल कॉलेज बड़ी घोषणाएं अब तक अधूरी 2026-27 के लिए नए बजट प्रस्ताव
