ये सरकारी स्कूल 75 साल पुराना है, जब झालावाड़ स्कूल हादसे की खबर सुनी तो दिल बैठ गया। यहां करीब 237 बच्चे पढ़ते हैं। उनकी चिंता सताने लगी इसके वॉट्सऐप ग्रुप को एक्टिव कर भामाशाहों और ग्रामीणों को जोड़ा और मदद मांगी। यकीन नहीं हुआ जब 111 लोगों ने मिलकर 3 महीने में 40 लाख रुपए इकट्ठे कर लिए। भामाशाहों के अलावा गांव में मजदूरी करने वाले ग्रामीण ने भी 2 लाख से ज्यादा का सहयोग दिया। स्कूल में पिंक टॉयलेट, ओपन जिम, CCTV कैमरे, फर्नीचर जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही है। साथ ही टपकती छत, गिरते प्लास्टर को भी हटाकर नया प्लास्टर किया जा रहा है। पढ़िए झालावाड़ की घटना के बाद कैसे बदला छोटे से गांव के सरकारी स्कूल का रूप जिला- पाली उपखंड- मारवाड़ का राणावास गांव झालावाड़ हादसे के बाद शुरू हुई चिंता राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल के प्रिंसिपल गुलाब राम हटेला बताते हैं- 25 जुलाई को झालावाड़ के पिपलौदी गांव में सरकारी स्कूल में हुए हादसे के बाद लगा कि हमारी स्कूल भी बेहद पुरानी है। यहां भी ऐसा हादसा न हो जाए। ऐसे में, ग्रामीणों और स्टाफ से चर्चा कर इसकी मरम्मत कराने की ठानी। हटेला ने बताया- बरसात के दौरान छत से पानी टपकता था। ऐसे में स्टूडेंट को बैठने में दिक्कत होती थी और दीवारों और छत से चूने का प्लास्टर तक गिर जाता था। स्कूल में चल रहे रेनोवेशन की तस्वीरें… वॉट्सऐप ग्रुप से मांगी मदद हटेला कहते हैं- स्कूल का एक वॉट्सऐप ग्रुप बना हुआ था। जिसमें 50 के करीब मेंबर थे। उस ग्रुप में गांव के मौजिज लोगों के साथ प्रवासी ग्रामीणों को जोड़ा। इसके बाद ग्रुप में लोगों की संख्या 385 हो गई। ग्रुप में स्कूल के जर्जर भवन के फोटो, वीडियो शेयर किए। सभी को बताया कि इस स्कूल में गांव के होनहार बच्चे पढ़ाई करते हैं। जिस तरह की भवन की हालत है उसे सुधारा नहीं गया तो यहां भी झालावाड़ जैसी घटना हो सकती है। ऐसे में भामाशाहों से सहयोग की अपील की। ताकि टपकती छत और गिरने प्लास्टर से स्टूडेंट को निजात मिल सके। प्रिंसिपल हटेला ने बताया- 3 महीने के अंदर-अंदर सभी का रिस्पॉन्स आने लगा। विजयराज कटारिया परिवार राणावास हाल चेन्नई ने स्कूल के मुख्य गेट बनाने के लिए 7 लाख 77 हजार 77 रुपए घोषणा की। तो किसी ने सम्पूर्ण कक्षा में फर्नीचर की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी ली। तो किसी ने कमरों में पंखे इनवर्टर लगाने की जिम्मेदारी ली। मजदूरी करने वाले कन्हैया लाल ने दिए 2.11 लाख प्रिंसिपल ने बताया- खास बात यह थी कि राणावास गांव के कन्हैयालाल वाल्मीकि जो मजदूरी का काम करते हैं, उनकी तरफ से भी पेशकश आई। उन्होंने एक एक क्लास रूम सुधारने के लिए अपनी तरफ से 2 लाख 11 हजार रुपए देने की घोषणा की। साथ ही स्कूल के टीचर विकास चौधरी जो मूल रूप से सीकर जिले के है। उन्होंने भी एक कक्षा कक्ष के रेनोवेशन के लिए 2 लाख 11 हजार रुपए देने की घोषणा की। भामाशाह पोखर सीरवी ने भी 5 लाख का सहयोग किया। 3 महीने में 40 लाख रकम इकट्ठा की प्रिंसिपल ने बताया- 3 महीने के भीतर 111 भामाशाहों के सहयोग से 40 लाख रुपए की बड़ी रकम एकत्रित की जा सकी। जिससे स्कूल को किसी मॉडल स्कूल भवन के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्कूल भवन के निर्माण कार्य का सारा लेखा-जोखा भामाशाह हेमंत सीरवी देख रहे हैं। उन्होंने अन्य भामाशाहों को इस नेक काम में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में स्कूल के 16 क्लास रूम में से 13 का रेनोवेशन का चल रहा है। जिसमें छत मरम्मत, कक्षा कक्षों में प्लास्टर और फर्श को भी नया बनवाया जा रहा है। भामाशाह का लगेगा स्कूल में शिलालेख स्कूल प्रिंसिपल हटेला ने बताया कि 2 लाख 11 हजार रुपए का सहयोग करने वाले भामाशाह का कक्षा कक्ष में शिलालेख लगाया जाएगा। जिस पर उनका नाम लिखा जाएगा। भामाशाहों के इस सहयोग को लेकर जिला कलेक्टर एलएन मंत्री ने उनके इस सहयोग की तारीफ की और कहां इसी तरह गांव के सभी जिम्मेदार गांव के स्कूल को संवारने की जिम्मेदारी अपने मन से उठा ले तो जिले का एक भी स्कूल भवन जर्जर हालत में नहीं रहेगा। उन्होंने भामाशाहों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
