जिस संस्था का उद्देश्य खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करना और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना हो, उसी संस्था पर अगर प्रदेश की सर्वोच्च ऑडिट एजेंसी करोड़ों रुपए की वित्तीय गड़बड़ी का संदेह जताए तो मामला स्वाभाविक रूप से गंभीर बन जाता है। नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एक रिपोर्ट में राजस्थान खेल परिषद के खातों में कई स्तरों पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। राजस्थान के नियंत्रक महालेखा परीक्षक सतीश गर्ग ने कुछ समय पहले मुख्य सचिव और वित्त सचिव को यह रिपोर्ट भेजकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत किया था। खास बात यह है कि स्पोर्ट्स काउंसिल के ऑडिटर की शिकायत आईसीएआई और एनएफआरए तक की गई है। पब्लिक डिपॉजिट अकाउंट में विसंगतियां मिलीं, जवाब नहीं रिपोर्ट के अनुसार पब्लिक डिपॉजिट (पीडी) अकाउंट में भारी विसंगतियां मिली हैं। खातों में कुल व्यय 230.75 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है, जबकि वार्षिक खातों की जांच में 192.55 करोड़ रुपए का ही खर्च सामने आया। अर्थात 38.20 करोड़ रुपए का अंतर, जिसके बारे में अब तक स्पोर्ट्स काउंसिल कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई है। 13 साल में 210 करोड़ की ग्रांट आई, खर्च कहां हुए- कोई रिकॉर्ड नहीं
2011 से 2023 के बीच सरकार द्वारा 209.54 करोड़ रुपए की ग्रांट स्पोर्ट्स काउंसिल को दी गई। ऑडिट में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह धनराशि जिन मदों के लिए जारी की गई, उन्हीं मदों में उपयोग हुई या नहीं। अर्थात् 13 वर्षों की ग्रांट के उपयोग का पूरा विवरण अधर में है। बैंक और खेल परिषद के रिकॉर्ड में बड़ा अंतर 5 वर्षों से बही-खाता एक जैसा, इसमें न खर्च बढ़ा, ना ही ब्याज रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि स्पोर्ट्स काउंसिल के पिछले पांच वर्षों के बही खाते एक समान हैं। न कोई नया खर्च दिखाया गया, ना फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज का कोई उल्लेख नहीं है। 38.52 करोड़ रुपए का फंड पांच साल से अप्रयुक्त दिख रहा है। कई बैंक खातों के रिकॉर्ड काउंसिल के खातों से मेल ही नहीं खाते। ये डिटेल मेरे आने से पहले की है
“ये सारे जो भी डिटेल हैं, मेरे स्पोर्ट्स काउंसिल में आने से पहले की हैं। ऑडिटर ने ठीक से काम नहीं किया। हम जल्द ही टेंडर करके नया ऑडिटर नियुक्त करने जा रहे हैं।”
– डॉ. नीरज के पवन, अध्यक्ष, स्पोर्ट्स काउंसिल
