नमस्कार, गुलाबी रंग जयपुर की पहचान है, लेकिन हाथी को गुलाबी नहीं करना चाहिए था। हालांकि सरकार में रंगों की चर्चा है। करौली में किरोड़ी बाबा काफिला लेकर दंगल देखने पहुंच गए। दौसा में वकील साहब ने ASI को जलवा दिखा ही दिया और अलवर में ऐसी सड़क से तौबा। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. सीएम बोले- रानी? रानी कैसा होता है? आशा कार्यकर्ताएं और सहायिकाएं मंच के सामने थीं। मुख्यमंत्रीजी ने उन्हें 2 यूनिफॉर्म के लिए पैसे ट्रांसफर किए थे। डायस पर मुख्यमंत्रीजी थे और मंच पर माइक थामे उप मुख्यमंत्री साहिबा खड़ी थीं। यूनिफॉर्म का कलर क्या होगा, यह तय करने का उत्तम अवसर था। मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री और आशा कार्यकर्ता मिलकर कलर तय करने लगे। दीया कुमारी ने केसरिया का जिक्र करते हुए सीएम से बात की। सीएम ने किसी कुंभी वाले कलर का जिक्र किया। महिलाओं की आवाज आई- रानी। डिप्टी सीएम ने कन्फर्म किया- रानी? भीड़ से फिर आवाज आई- लाल। डिप्टी सीएम ने सलाह दी- लाल बहुत रेड हो जाएगा। भीड़ से दोबारा रानी की डिमांड हुई। सीएम चौंके- रानी? रानी कैसा होता है? डिप्टी सीएम ने स्थिति स्पष्ट की- रानी होता है पिंक जैसा। बहुत ज्यादा डार्क पिंक। रंग पर चर्चा लंबी खिंच रही थी। सीएम ने चर्चा को विराम देते हुए कहा- बस-बस। यह साड़ियों का शोरूम नहीं है। आप (डिप्टी सीएम) तय करके इनको (महिलाओं को) बता देना कि कौन सा कलर है। बैठिए। इस पूरी चर्चा के इतर रशियन फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा जयपुर के आमेर में खुद को और हाथी को गुलाबी रंग से पोतकर फोटो शूट कर गईं। खुद को कैसा भी रंगो, हाथी को तो बख्श देते। 2. दंगल में पहलवान का किरोड़ी बाबा को प्रणाम ताकत और पैंतरेबाजी का खेल है दंगल। कृषि मंत्री किरोड़ीलालजी को यह खेल खासा पसंद है। करौली के कैलादेवी में चल रहे मेले में दंगल देखने किरोड़ी बाबा पूरा काफिला लेकर पहुंच गए। दूर-दूर से पहलवान आए हुए थे। डूंगरों पर ऐसी भीड़ कि अहमदाबाद का स्टेडियम भी शरमा जाए। पहलवान एक दूसरे की लंगोट पकड़कर पटखनी देने की मशक्कत में जुटे थे। किरोड़ी बाबा ध्यान से एक-एक दांव देख रहे थे। हर दांव वक्त पर काम आता है। बाबा बारीकी से हुनर की परख कर रहे थे। पहलवान दंगल फतेह करके बाबा की तरफ बढ़ा और पैरों में धोक लगा दी। पहलवान भी जानते हैं कि बाबा के सियासी दांव-पेंच का तोड़ पहलवानों के पास भी नहीं है। तो आशीर्वाद ले लिया। 3. ASI पर भारी पड़ गए वकील साहब दौसा के कोतवाली थाने में वकील को देखकर ASI साहब की गर्मी बढ़ गई। हालांकि वेस्टर्न डिस्टरबेंस की मेहरबानी से मौसम गर्म नहीं था। लेकिन ASI पर ‘सिंघम’ सवार। वकील साहब एक सरकारी टीचर की जमानत कराने आए थे। ASI ने उन्हें राजकार्य में बाधा के रूप में देखा। वकील साहब ने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि ASI ने धमकी सी दी। कहा- स्वागत कक्ष में चुपचाप बैठो। लगता है कि आप भी हवालात में बंद होगे। ASI ने ऐसे धमकाया जैसे वे हवालात और स्वागत कक्ष में कोई अंतर नहीं समझते। उन्होंने धौंस दिखाई- ये वर्दी ऐसे ही नहीं मिली है। वकील ने समझाया- मेरे मुवक्किल को पहले नोटिस देते। सीधे थाने में क्यों बुलाया? सवाल चुभने वाला था ही। कानून से कानून की बात करने की हिमाकत? ASI साहब ज्यादा बिगड़कर बोले- मैं जो चाहे सो करूं, आप कोर्ट में चैलेन्ज कर देना, बकवास करने की जरूरत नहीं है। ASI ऐसे तमके जैसे वे कानून और बकवास में भी कोई अंतर नहीं समझते। इस पूरे मामले की हवा फैली तो तमाम वकील बिगड़ गए। आंदोलन पर उतर आए। उधर, वकील साहब भी पॉलिटिकल फैमिली से निकल आए। पूर्व जिलाध्यक्ष उनके छोटे भाई और बड़े भैया विधायकी का चुनाव लड़ चुके। रुझान यह आया कि ASI साहब को चार्जशीट थमाकर लाइन हाजिर कर दिया गया। 4. चलते-चलते.. आजकल चप्पलें इतनी मजबूत बन रही हैं कि उनसे सड़कें उधेड़ी जा सकती हैं। अलवर के देसूला गांव के लोगों ने ‘आओ प्रयोग करके देखें’ योजना के तहत यह साबित कर दिया। हालांकि सड़क 19 लाख की लागत से बनाई गई थी। रकम के अनुसार ठेकेदार ने सड़क भी उन्नीस ही बनाई। इतनी कम रकम में ठेकेदार नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या? उसने कम बजट में ‘सस्ती से सस्ती और अच्छी से अच्छी’ सड़क बना दी। 20 मिलीमीटर की जगह सड़क की मोटाई 5 मिलीमीटर ही रखी। सड़क का जीरो फिगर गांव वालों को पसंद नहीं आया। वे मौके पर पहुंचे और चप्पलों से रगड़-रगड़ कर सड़क की चमड़ी उतार दी। PWD की अधीक्षण अभियंता मैडम ने यह कहकर डैमेज कंट्रोल किया- जेईएन को भेजा है, जांच कर रहे हैं। इनपुट सहयोग- धर्मेंद्र शर्मा (करौली), राघवेंद्र गुर्जर (दौसा), धर्मेंद्र यादव (अलवर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..

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