शनिवार की दोपहर सिविल लाइंस की ओर कदम बढ़ते ही लगा कि जैसे लुधियाना नहीं, त्रेतायुग की अयोध्या में प्रवेश कर लिया हो। जय श्रीराम की गूंज, सड़क पर रंगोली की महक, ऊपर उड़ते पुष्प और सामने उमड़ता जनसागर यह सब मिलकर ऐसा दृश्य रच रहे थे, जिसे शब्दों में समेटना कठिन था। 38 दिवसीय महासंकीर्तन महोत्सव के 29वें दिन श्रीराम के राजतिलक का उत्सव शुरू होने ही वाला था और पूरा क्षेत्र भक्ति की ऊर्जा से धड़क रहा था। दोपहर 3 बजे मंदिर प्रांगण में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ शुरू हुआ। हनुमान चालीसा की गूंज मंदिर की दीवारों से टकराकर सीधे आकाश तक जा रही थी। सैकड़ों श्रद्धालु हाथ जोड़कर खड़े थे। पाठ समाप्त होते ही आंखें उसी रथ की तरफ उठ गईं, जिसकी ओर सबकी प्रतीक्षा थी। फूलों से ढका, सुनहरे चमकदार कपड़ों से सजा, और सुगंध से महकता वह रथ जैसे स्वर्ग से उतर आया हो। उस पर विराजमान श्रीराम, माता जानकी और भाई लक्ष्मण की फोटो देखकर भीड़ स्वतः झुक गई। जैसे ही यात्रा मंदिर से निकली, मार्ग संकीर्तन की धुन से भर गया हरे कृष्ण, हरे राम… श्री सिद्ध परिकर के साधकों की मधुर आवाजें सड़क के हर मोड़ को पवित्र कर रही थीं। दीप नगर, झंडू चौक, शिव मंदिर चौक, वृंदावन रोड हर जगह लोग घरों के बाहर खड़े थे। किसी ने फूल बरसाए, किसी ने दीप जलाया, किसी ने रंगोली बिछाई। ऐसा स्वागत शायद किसी राजा के राज्याभिषेक पर भी न हुआ हो। महिलाओं ने पीले वस्त्र धारण किए हुए थे। पुरुष श्रद्धालु केसरिया पगड़ियों में तेजस्वी लग रहे थे। पूरा मार्ग पीले और केसरिया रंग से घिरा था। जगह-जगह सेवा केंद्रों पर हलवा, फलों और पेय पदार्थों की व्यवस्था थी। श्रद्धालुओं की थाली से पहले दूसरों की सेवा करने का भाव साफ झलक रहा था। जब यात्रा वापस मंदिर पहुंची, तब सूरज ढल चुका था और दीपों की रोशनी मंदिर परिसर को स्वर्णिम आभा दे रही थी। अंदर पं. जगदीश चंद्र कोमल महाराज के बधाई उत्सव के गीतों की मीठी लहरें गूंज रही थीं। लोग तालियों की लय में झूम रहे थे। उस क्षण मंदिर प्रांगण स्वर्ग लोक जैसा प्रतीत हो रहा था। फिर श्रीराम कथा प्रारंभ हुई। पं. राज कुमार शर्मा के शब्दों में वह भाव था, जिसे सुनकर लगा कि हम सच में किसी दिव्य घटना के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि कलयुग में श्रीराम के राजतिलक का साक्षी बनना हमारे लिए सौभाग्य का प्रसाद है। सभा में विधायक चौधरी मदन लाल बग्गा, प्रवीण बांसल, केवल बुद्धिराजा, बॉबी शर्मा, अनिल शर्मा और कई गणमान्य लोग मौजूद थे। पर उस भीड़ में हर कोई समान था एक भक्त, एक दर्शक, एक सहभागी।