राज्य सरकार के ‘शुद्ध आहार–मिलावट पर वार’ अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले चार माह में जिले में बड़ी कार्रवाई की है। इस विशेष ग्रीष्मकालीन अभियान के अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई। यह अभियान खाद्य सुरक्षा आयुक्त राजस्थान, जयपुर के निर्देशानुसार तथा जिला कलेक्टर मोहम्मद जुनैद पी.पी. और अभिहित अधिकारी (खाद्य सुरक्षा) डॉ. महेन्द्र कुमार परमार के मार्गदर्शन में चलाया गया। इस दौरान जिले से कुल 82 खाद्य नमूने लिए गए। 82 सैंपल में से 30 फेल जांच में इन 82 नमूनों में से 30 फेल पाए गए। इनमें घी, नमकीन, मैंगो जूस, तेल, मिठाइयाँ, आइसक्रीम, दूध और दुग्ध उत्पाद शामिल हैं। कुल 11 नमूने स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित (Unsafe) तथा 19 नमूने अमानक (Substandard) घोषित किए गए हैं। बिक्री पर लगाई रोक अभिहित अधिकारी (खाद्य सुरक्षा) डॉ. महेन्द्र कुमार परमार ने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों के नमूने फेल हुए हैं, उन्हें खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध धारा 32 एवं 34 के तहत सुधार और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए संबंधित उत्पादों की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है। साथ ही, इन प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबन के लिए उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी घनश्याम सिंह सोलंकी ने जानकारी दी कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत मिलावटखोरी के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने पर छह माह से लेकर आजीवन कारावास और एक लाख से दस लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। अमानक खाद्य सामग्री पाए जाने पर अधिकतम पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जनवरी से अब तक अमानक खाद्य सामग्री बेचने वाले 11 प्रतिष्ठानों के विरुद्ध अतिरिक्त जिला कलेक्टर न्यायालय, सलूम्बर में परिवाद प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें से 5 प्रकरणों में न्यायालय द्वारा कुल 1 लाख 25 हजार रुपए की शास्ति लगाई जा चुकी है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे केवल प्रमाणित और गुणवत्तायुक्त खाद्य पदार्थों का ही उपयोग करें तथा किसी भी प्रकार की मिलावट संबंधी शिकायत विभाग को तत्काल उपलब्ध कराएं।