सरकार ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जयपुर द्वितीय के अध्यक्ष ग्यारसी लाल मीणा की सभी न्यायिक शक्तियों को छिन लिया। उन पर अगले आदेश तक किसी भी मामले की सुनवाई करने और आदेश सुनाने पर रोक लगा दी गई। उपभोक्ता मामले विभाग ने इसे लेकर 19 जून को आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया कि जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ जांच लंबित रहने तक उन्हें न्यायिक और अर्द्ध न्यायिक कार्यों से दूर किया जाता है। अध्यक्ष के रूप में उनकी सभी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां भी तत्काल प्रभाव से निलंबित की जाती हैं। ग्यारसीलाल मीणा अपने आदेशों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं। उन्होंने पान मसाला के विज्ञापन को लेकर अभिनेता सलमान खान को जमानती वारंट जारी कर दिए थे। वहीं खाने में खराब तेल का इस्तेमाल करने पर मैकडॉनल्ड्स के एमडी राजीव रंजन और ब्रांड एंबेसडर रहे बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह-कार्तिक आर्यन को कानूनी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। साथ ही उनका सबसे चर्चित फैसला अलवर के सिलीसेढ़ बांध क्षेत्र और सरिस्का टाइगर रिजर्व के संवेदनशील बफर जोन में बने इस रिसॉर्ट की सील खुलवाने का रहा। उन्होंने न केवल यूआईटी अलवर की सील को अवैध घोषित किया, बल्कि 13 फरवरी 2026 को खुद मौके पर जाकर इसकी सील खुलवा दी। बताया जाता है कि इस मामले में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इसके बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। 16.50 लाख उगाही के आरोप आदेश में कहा गया है कि अध्यक्ष के खिलाफ लिखित शिकायत मिली है। इसमें गंभीर कदाचार, आपराधिक धोखाधड़ी, पद के दुरुपयोग और न्यायपालिका के नाम पर 16.50 लाख रुपए की अवैध उगाही जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें कहा कि उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष का पद गरिमामयी, अर्द्ध न्यायिक और जन-विश्वास का पद है। इस पद पर आसीन व्यक्ति से उच्चतम स्तर की सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और बेदाग नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है। कानून के अनुसार- न्यायिक या अर्द्ध न्यायिक पीठ का संचालन करने वाले किसी भी अधिकारी का आचरण पूरी तरह से संदेह से परे होना चाहिए। जब किसी अधिकारी के खिलाफ न्यायपालिका की छवि धूमिल करने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच लंबित हो, तब तक उन्हें न्यायिक पीठ पर बनाए रखना प्राकृतिक न्याय, सुशासन के सिद्धांतों और निष्पक्ष जांच के प्रतिकूल है। पहले भी सरकार ने किया था बर्खास्त ग्यारसीलाल मीणा को सरकार ने पहले भी 3 जून 2025 को बर्खास्त कर दिया था। उन्हें सरकार ने प्रशासनिक कदाचार और वित्तीय सीमाओं के उल्लंघन के आरोपों के चलते बर्खास्त किया था। बाद में हाईकोर्ट से 26 अगस्त 2025 को उन्हें स्टे मिल गया। इसके बाद से वे फिर से पद पर काबिज हो गए थे। अब एक बार फिर सरकार ने शिकायत मिलने के बाद उनकी शक्तियां छिन ली हैं। नियुक्ति के समय भी हुआ था विवाद ग्यारसी लाल मीणा की नियुक्ति 13 मार्च 2023 को गहलोत सरकार के समय हुई थी। उस समय कांग्रेस लीगल सेल से जुड़े वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि कांग्रेस सरकार में बीजेपी कार्यकर्ताओं को नियुक्ति दी जा रही हैं। उस समय ग्यारसीलाल मीणा बीजेपी एसटी मोर्चे की प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य और बीजेपी लीगल सेल के मेंबर थे। नियुक्ति के बाद बीजेपी के कार्यक्रमों और नेताओं के साथ उनके फोटो शेयर किए गए थे।
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