मौसम परिवर्तन व बढ़ती ठंड के कारण जिला अस्पताल की ओपीडी सोमवार शाम तक 4413 पहुंची। नए साल में मावठ की बारिश के बाद अचानक सर्दी और शीत लहर ने दस्तक दी है। इससे लोगों में मौसमी बीमारियां बढ़ी हैं। नए साल के इन 5 दिनों में ही 15 हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए आए हैं, इनमें 875 मरीजों को भर्ती किया गया। अस्पताल के मेडिसिन वार्ड भी लगभग फुल हो चुके हैं। अस्पताल अधीक्षक डॉ. हनुमानराम चौधरी का कहना है कि पिछले साल की तुलना में ओपीडी अधिक बढ़ी है। एमसीएच विंग में एक अतिरिक्त पर्ची काउंटर को अस्थायी तौर पर खोला गया। एमसीएच विंग में तीन पर्ची काउंटर खोले, कतारें डॉक्टर ओपीडी तक पहुंचीं न्यू टीचिंग बिल्डिंग में पर्ची काटने के लिए तीन काउंटर व एक अलग से सीनियर सिटीजन काउंटर की व्यवस्था है, लेकिन अचानक भीड़ इतनी बढ़ गई है कि इन काउंटर्स के आगे 100-100 लोगों की भीड़ है। वहीं एमसीएच विंग में दो पर्ची काउंटर हैं, लेकिन सोमवार को अचानक भीड़ उमड़ने के साथ अस्पताल प्रशासन को अस्थायी तौर पर एक अतिरिक्त पर्ची काउंटर खोलना पड़ा। शिशु व गायनिक मरीजों के मौसमी बीमारियों की चपेट में आने से कतारें गायनिक व शिशु रोग ओपीडी के डॉक्टर चेंबर तक पहुंचने लगी हैं। यही हालात वार्डों के भी बने हैं। यहां मेडिसिन के सभी वार्ड व आईसीयू फुल हैं। शिशु वार्ड में भी स्थिति यह है कि एक बेड पर दो-दो मरीज हैं। वहीं निशुल्क दवा काउंटर्स, ब्लड कलेक्शन सेंटर, सोनोग्राफी सेंटर व एक्स-रे पर भी लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। सुबह 9 बजे अस्पताल पहुंचने वाले मरीज को पर्ची लेने के बाद डॉक्टर से चेकअप से लेकर जांचें कराने के बाद दोपहर 3 बजे के बाद घर लौटना पड़ रहा है। कोई मरीज देरी से पहुंचता है तो उसे अगले दिन दोबारा जांच के लिए आना पड़ रहा है। भास्कर एक्सपर्ट – अस्थमा, निमोनिया, वायरल के मरीज बढ़े, खांसी जल्द ठीक नहीं हो रही चेस्ट एंड टीबी विभाग की ओपीडी करीब 250 से 300 तक पहुंच गई है। मरीजों से वार्ड फुल हैं, कुछ मरीज आईसीयू में भी भर्ती किए गए हैं। ओपीडी में पहुंचने वाले मरीज सांस लेने में परेशानी, सीओपीडी, अस्थमा व वायरल के हैं। सर्दी बढ़ने के साथ लंग्स सिकुड़ने से सीओपीडी के मरीज बढ़ जाते हैं। मरीजों की खांसी करीब 8–10 दिन बाद ठीक हो रही है। बुजुर्ग गर्म कपड़े पहनें और ठंड से बचाव करें। सांस में तकलीफ, लगातार खांसी, सीने में दर्द या दबाव, तेज बुखार आने पर डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। चाय, सूप या पानी जैसे गर्म तरल पदार्थों का सेवन करें। गले में खराबी व कफ जमा होने पर गर्म पानी की भाप लें। -डॉ. मनीष बैरवा, असिस्टेंट प्रोफेसर, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग