सीकर के चर्चित पूर्व सरपंच सरदार राव मर्डर केस में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को कोर्ट ने बरी कर दिया। 9 दोषियों को सजा सुनाई गई। कोर्ट ने कहा कि प्रॉसीक्यूशन (पीड़ित पक्ष के वकील) की ओर से पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए गए। ऐसे में साक्ष्यों के अभाव में लॉरेंस को बरी किया गया। 9 साल तक चले इस केस में पीड़ित पक्ष ने कुल 76 गवाहों के बयान और 235 दस्तावेज पेश किए थे। हत्याकांड का मास्टरमाइंड गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को ही बताया गया था। आरोप था कि उसी ने जेल में बैठकर इस हत्या की साजिश रची। फिर आखिर कौन से वो सबूत थे, जिन्हें पुलिस जुटा नहीं पाई और उसका फायदा लॉरेंस को मिला? भास्कर ने इस मामले में कोर्ट का 146 पेज का ऑर्डर पढ़ा, लॉरेंस की भूमिका और उसके सबूत की कमी से जुड़ा एक-एक फैक्ट जुटाया। पढ़िए- ये रिपोर्ट सबसे पहले जानते हैं सरदार राव मर्डर केस में चार्जशीट के अनुसार लॉरेंस बिश्नोई की भूमिका और आरोप क्या थे? अब वो आरोप, जिन्हें पुलिस साबित नहीं कर पाई और कमियां छोड़ीं 1. लॉरेंस से कोई फोन रिकवर नहीं हुआ, जिससे बात हुई हो लॉरेंस पर आरोप था कि उसने अजमेर जेल में बंद रहने के दौरान फोन के जरिए शूटर्स बुलवाए थे। पुलिस उससे फोन रिकवर नहीं कर पाई। फोन रिकवर होता तो यह अहम सबूत बन सकता था। 2. फोन नंबर लॉरेंस का, ये साबित नहीं हुआ लॉरेंस ने शूटरों से किस मोबाइल नंबर से बात की या संपर्क किया, शूटर पकड़े जाने के बाद भी कोई फोन नंबर ऐसा साबित नहीं हुआ, जिससे पता चले कि वह लॉरेंस का था। 3. एफएसएल की कोई भी रिपोर्ट पेश नहीं की गई किसी भी मर्डर में FSL अहम सबूत माना जाता है। अनुसंधान (जांच) अधिकारी ने इस मामले में FSL की रिपोर्ट पेश नहीं की, जिसमें साबित हो कि लॉरेंस और शूटरों के बीच किसी तरह की कोई बातचीत हुई हो। 4. लॉरेंस की वॉयस सैंपल रिकॉर्ड में ही नहीं लगाया 5. यतेंद्रपाल उर्फ टोपी की केस में भूमिका साबित नहीं हुई लॉरेंस के साथ इस मामले में यतेंद्रपाल उर्फ टोपी को सह अभियुक्त बनाया गया था। आरोप था कि यतेंद्रपाल उर्फ टोपी को लॉरेंस ने निर्देश दिए थे। लेकिन लॉरेंस बिश्नोई द्वारा शूटर्स को इंस्ट्रक्शन दिए गए हों या अपराध में मदद की हो, ऐसे कोई सबूत पेश नहीं किए गए। 6. हत्या के बदले पैसे की लेन-देन का सबूत नहीं कोर्ट के रिकॉर्ड में कोई ऐसे सबूत पेश नहीं किए गए, जिसमें यह तय हो कि लॉरेंस का सरदार राव की हत्या करने का कोई मोटिव था। 7. लॉरेंस के पास से पैसों की कोई रिकवरी नहीं हुई लॉरेंस ने यह हत्या पैसों के लिए की, इसका कोई सबूत पेश नहीं किया गया। लॉरेंस ने हरदेवाराम और उसके भतीजे सुभाष मूंड (सुभाष बराल) के साथ किसी प्रकार का पैसा लिया हो ऐसा कोई सबूत भी नहीं था। 8. सुभाष के साथ लॉरेंस का जेल में होने की थ्योरी कोर्ट ने नहीं मानी लॉरेंस का सरदार राव की हत्या करने का कोई मोटिव हो, ऐसा कोई साक्ष्य पुलिस नहीं जुटा पाई। चार्जशीट के अनुसार, वहां सुभाष बराल ने लॉरेंस को हत्या करवाने को कहा और लॉरेंस ने अपने शूटर को कॉल किया। लॉरेंस पक्ष के वकील के अनुसार यह आरोप इसलिए लगाया गया कि मर्डर के दौरान लॉरेंस अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में था और तब सुभाष बराल भी उसी जेल में बंदी था। कोर्ट के अनुसार दोनों का सेम टाइम पर एक जेल में होना लॉरेंस का इस हत्या में शामिल होना साबित नहीं करता। 9. जेल में लॉरेंस फोन पर बात करता था, गवाह मुकरा जांच अधिकारी ने बताया था कि अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल के हॉस्पिटल में सुभाष मूंड के कहने पर लॉरेंस ने योजना बनाई और शूटर भेजे। इसकी गवाही नर्सिंग ऑफिसर राजवीर ने दी थी। लेकिन नर्सिंग ऑफिसर राजवीर बाद में पक्ष द्रोही (मुकरा) घोषित हुआ। क्या था सरदार राव मर्डर केस? मामला 23 अगस्त 2017 का है। 9 साल पहले सीकर में राजनीतिक रंजिश के चलते पूर्व सरपंच सरदार राव को किराने कि दुकान में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मर्डर के लिए चार शूटर्स सीकर आए थे। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट पेश की। चार्जशीट के अनुसार, इस मर्डर की पटकथा आनंदपाल गैंग के सुभाष बराल और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने अजमेर सेंट्रल जेल में लिखी थी। मर्डर की सुपारी देने वाला भी सुभाष बराल का चाचा हरदेवा राम था। सितंबर 2017 में जुराठड़ा ग्राम पंचायत में उप चुनाव होना प्रस्तावित था। इससे पहले जुलाई 2017 में वोटर लिस्ट में नए नाम जुड़वाने का काम चल रहा था। 28 जुलाई को सरदार राव और हरदेवा राम अपने-अपने लोगों के नाम जुड़वाने के लिए सीकर कलेक्ट्रेट की निर्वाचन शाखा पहुंचे थे। यहां हरदेवाराम और सरदार राव का आमना-सामना हुआ था। तब हरदेवा राम ने सरदार राव को धमकी दी थी- चुनाव से पहले तुम्हें देख लूंगा और मरवा दूंगा। हरदेवा राम ने अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद अपने भतीजे और आनंदपाल गैंग के सदस्य सुभाष बराल को कॉल किया था। सुभाष बराल जेल में मोबाइल इस्तेमाल करता था। हरदेवा राम ने सरदार राव को रास्ते से हटाने की बात कही थी। तब सुभाष बराल ने जेल में रहते हुए ही सरदार राव को जान से मारने की प्लानिंग की थी। 9 साल सुनवाई, 13 जनवरी को दोषी करार कोर्ट ने 13 जनवरी को आरोपियों को दोषी करार दिया था। 22 जनवरी को इस केस में दोषियों को सजा सुनाई थी। कोर्ट ने सबूतों-गवाहों के आधार पर लॉरेंस और आरोपी यतेंद्र को दोषमुक्त कर दिया। 3 को आजीवन कारावास व 6 को दस-दस साल की सजा सुनाई गई। 14 को किया था गिरफ्तार, संपत नेहरा पर जांच पेंडिंग पुलिस ने मामले में सुपारी देने वाले हरदेवा राम, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, सुभाष मूंड उर्फ सुभाष बराल, ओमप्रकाश मूंड, सुनीत, भानू प्रताप, विजयपाल नागवा, शूटर अंकित व संपत नेहरा, शूटर भेजने वाला रविंद्र सिंह के अलावा मुकेश कुमार, कुलदीप उर्फ बोदू, नरेंद्र कुमार और यतेंद्र पाल को गिरफ्तार किया था। मामले में एक शूटर अंकित भादू का पहले ही पंजाब के मोहाली में एनकाउंटर हो गया था। संपत नेहरा और इस हत्याकांड के लिए गाड़ी व हथियार उपलब्ध करवाने वाला जग्गू भगवानपुरिया के खिलाफ 173(8) में जांच पेंडिंग है। विजयपाल नागवा, रेडी, रवींद्र, संपत नेहरा और जग्गू भगवान पुरिया (कुल 5 लोग) के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 173(8) में इन्वेस्टिगेशन पेंडिंग है। इन मामलों में भी लॉरेंस हो चुका है बरी लॉरेंस के वकील रघुनाथ राम सुला ने बताया- जोधपुर के शास्त्रीनगर थाना में दर्ज हुए मामले में अनमोल और हरेन्द्र से तलाशी में मोबाइल रिकॉर्डिंग मिली थी। उस मोबाइल में लॉरेंस की रिकॉर्डिंग भी थी, लेकिन सीकर वाले मामले में अनमोल और हरेन्द्र से कोई पूछताछ नहीं की गई थी। इस मामले में हरेन्द्र और लॉरेंस बिश्नोई के आपस में बात होने का आरोप लगाया गया, लेकिन जांच अधिकारी ने सबूत पेश नहीं किया। सबसे महत्वपूर्ण गवाह राजवीर पक्षद्रोही हो गया। ऐसे में लॉरेंस के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने पर संदेह का लाभ देकर बरी किया गया। खबर में सहयोग : सुरेंद्र माथुर, सीकर ——————————- पूर्व सरपंच मर्डर केस की यह खबर भी पढ़िए… गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई पूर्व सरपंच मर्डर केस में बरी:3 को उम्रकैद, 6 को 10-10 साल की सजा; दुकान में घुसकर गोलियों से भूना था सीकर में पूर्व सरपंच सरदार राव मर्डर केस में करीब 9 साल बाद 23 जनवरी को एससी-एसटी कोर्ट ने फैसला सुनाया था। मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और एक अन्य आरोपी को बरी कर दिया गया। 3 दोषियों को उम्रकैद और 6 को 10-10 साल की सजा सुनाई गई। पढ़िए पूरी खबर…
