नमस्कार, चीफ साहब डोटासरा जी घर में सोनपापड़ी लेकर ED की रेड का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि ‘जिमाने’ वाले अभी तक नहीं आए हैं। बीकानेर में कांग्रेस का बोर्ड बना है, ऐसे में भाजपा पार्षद का ‘कपड़ा फाड़’ प्रदर्शन चर्चा में रहा। चतुर्थ श्रेणी में चयनित कर्मियों को ‘रसोइया’ नहीं बनना था और जोधपुर के देचू में तय हो रहा है कि कौन बनेगा ‘सड़क का सरपंच’। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. डोटासरा जी क्यों लाए ‘सोन-पापड़ी’? सोन पापड़ी के बारे में कहा जाता है कि यह फारस की पारंपरिक मिठाई पश्मक का अपग्रेड वर्जन है। वक्त के साथ इसमें पंजाब का पतीसा भी घुल गया। पीसीसी चीफ डोटासरा जी ने सोनपापड़ी में विरोध की चटनी भी मिला दी है। कांग्रेस के बड़े नेता पुलिस मुख्यालाय पहुंचे थे। डीजीपी साहब से मिले। ज्ञापन दिया। ज्ञापन में भर-भरकर बीजेपी पर आरोप लगाए थे। खास तौर पर निकाय चुनाव के दौरान बल प्रदर्शन का जिक्र था। चुनाव में बल के कई रूप दिखाई देते हैं। डोटासरा जी मुख्यालय से बाहर आए तो मीडिया वालों ने घेर लिया। सवाल उठा- पीएचक्यू में क्यूं आए? डोटासरा जी का दर्द छलका। बोले- विपक्ष को डराया धमकाया जा रहा है। ईडी-सीबीआई का डर दिखाया जा रहा है। मेरे एक मित्र ने फोन करके बताया कि सोर्स से सूचना मिली है कि जल्द ही आपके यहा ईडी की रेड पड़ेगी। रेड की बात सुनकर मैंने सुबह ही सोनपापड़ी मंगाकर रख ली। अब अधिकारियों का इंतजार कर रहा हूं। वे आएंगे तो उन्हें नाश्ते में सोन पापड़ी खिलाऊंगा। यह तय बात है कि सोन पापड़ी खिलाकर बला नहीं टलेगी। किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पार्टी की अंदर की खींचतान को दूर करना पड़ेगा। सीएम कौन बनेगा और निकाय चुनाव में किसने क्या गलती की, इन सब चीजों से पार पाकर सभी को जुटना होगा। सबके जुटने की एक खुशनुमां तस्वीर भी कांग्रेस खेमे से आई। जिसमें दिग्गज नेता भोजन की टेबल पर एक कतार में बैठे थाली आने का इंतजार कर रहे हैं। जूली जी ने मेन्यू में शामिल सब्जियों का जिक्र करना शुरू किया। गहलोत साहब गौर से सुन रहे थे कि डोटासरा बीच में बोल पड़े- खाना तो तभी खाएंगे जब खिलाने वाले आएंगे। इस पर गहलोत-जूली हंस पड़े। मजबूत और एकजुट विपक्ष भी लोकतंत्र की मजबूती है। 2. निगम में कपड़ा फाड़ प्रदर्शन निकाय में जीतने वाले को निगम मिला और हारने वाले को गम। कहानी बीकानेर की है। भाजपा ने बाकी सभी नगर निगमों में जोरदार प्रदर्शन किया। लेकिन बीकानेर हार बैठी। स्थानीय नेताओं को इस हार का मलाल है। हार का गम ऐसा कि भुलाए नहीं भूल रहा। मन के भीतर की भड़ास कहां निकले? पार्षद महोदय ने तय किया कि निगम में ही निकालेंगे। तय होने के बाद पार्षद उसी तरह नगर निगम के दफ्तर पहुंचे जैसे तारासिंह पाकिस्तान पहुंचा था। वे सब कुछ उखाड़ देना चाहते थे। उनका बस चलता तो कांग्रेस का बोर्ड ही उखाड़ फेंकते। लेकिन चूंकि उनका बोर्ड नहीं बना था और हिसाब से वे विपक्ष में थे, इसलिए उनके हाथ में यही था कि वे मुद्दों की बात करें। उनके वार्ड में घर घर कचरा इकट्ठा करने वाला वाहन ऑटो टिपर नहीं पहुंच रहा था। इसके लिए उन्होंने रात में ही फोन कर दिया था। सुबह 10 बजे तक टिपर जब नहीं पहुंचा तो वे निगम पहुंच गए। कमिश्नर के कमरे में जाकर उन्होंने पहले गला फाड़ प्रदर्शन किया। इतना जोर-जोर से चीखे कि समझ नहीं आया कि वे कहना क्या चाहते हैं। कुछ शब्द जो समझ आए वे ये थे कि आपको कितने फोन किए। फिर भी टिपर नहीं आया। मजाक बनाकर रख दिया है। ऐसी तैसी कर दी है वार्ड की। जनता सवाल पूछती है। इस बीच एक कर्मचारी ने दबे स्वर में कुछ कह दिया। पार्षद महोदय उसे कूटने पर उतारू हो गए। चार लोग उन्हें अधर उठाकर बाहर ले गए। इसके बाद भी अधिकारियों के सामने उन्होंने उसी तर्ज पर अपने कपड़े फाड़ लिए जैसे हनुमान जी ने सीना चीरकर दिल में रामजी दिखा दिए थे। 3. चतुर्थ श्रेणी में चयनित होकर क्या करेंगे? चपरासी की नौकरी में भी लोगों को चॉइस चाहिए। यह करेंगे और यह नहीं करेंगे। भैया ऐसी नौकरी करना ही क्यों जो आपके कैडर को सूट नहीं करती। लेकिन नौकरी पर सरकारी का ठप्पा है। बस इतना काफी है। ‘सरकारी’ शब्द में ही सरकार है। एक बार यह ठप्पा जिस पर लग जाता है, उसका बेड़ा पार। फिर नौकरी चपरासी की ही क्यों न हो, वह राजा बनकर घूमता है। एक भाईसाहब ने कार के आगे नंबर प्लेट पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इस तरह लिखवाया जैसे कलेक्टर लिखा हुआ हो। बाजू में शान से खड़े होकर फोटो भी खिंचाई। कॉन्स्टेबल और सीआरपीएफ की नौकरियां छोड़-छोड़कर लोग चपरासी बनने आ गए। नौकरी भी लग गई। लेकिन जब उन्हें कार्यभार सौंपा गया तो बताया गया कि उन्हें रसोइये का काम भी करना पड़ेगा। यह सुनते ही कई युवा तुनक गए। आंदोलन पर उतार आए। बोले- कुछ भी करा लो लेकिन रसोइया नहीं बनेंगे। राजा महाराजाओं के जमाने में खानसामे की तूती बोलती थी। लेकिन कई राजा-बादशाह ऐसे भी थे जो भोजन का पहला कौर रसोइये को खिलाते थे। प्रेम के कारण नहीं, बल्कि यह जानने कि खाने में जहर तो नहीं मिला है। लेकिन भाईसाहब एक बात सौ टका खरी है जो शकील बदायूनी साहब ने 60 के दशक में ही लिख दी थी। लिखा था- दुनिया में हम आएं हैं तो जीना ही पड़ेगा, जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा। तो नौकरी अगर सरकारी है तो करनी ही पड़ेगी, रसोइया बनाकर काम में ले तो भी काम करना ही पड़ेगा। कई युवा काम में जुट गए हैं और आटा लगाने में मशक्कत कर रहे हैं। 4. चलते-चलते… पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट हो गई है। तारीखों का ऐलान हो ही चुका है। तारीखें खिसक भी चुकी हैं। कुल मिलाकर दंगल तैयार है। दंगल में पंच-सरपंच प्रत्याशी कूदते इससे पहले ही धूल का गुबार छा गया। गुबार छंटा तो बोर्ड पर लिखा था- देचू में आपका स्वागत है। देचू जोधपुर के फलोदी में है। हर किसी को पता था कि धूल का गुबार तापमान बढ़ने के कारण कम वायुदाब के भरोसे चलने वाली धूलभरी हवाएं कतई नहीं थीं। मेन मार्केट के एक खुले हिस्से में दो सांड लड़ रहे थे। टेस्ट मैच के युग से लेकर टी-20 क्रिकेट के युग तक देचू कस्बे में सांडों के युद्ध से रोमांचक दृश्य कुछ नहीं। दुकानदार सामान-सट्टे का माप-तौल भूलकर सांडों पर टकटकी लगा लेते हैं। दुकान पर खड़े ग्राहक भी हड़बड़ी को साइड में रखकर रोमांचक मुकाबले का आनंद लेने लगते हैं। चिंता उन्हें जिनके स्कूटर, बाइक, कार, साइकिल मैदान की सीमा में खड़े हैं। बड़े बुजुर्ग किस्से सुनाते हैं- यह कोई टक्कर थी? टक्कर तो सन उनहत्तर में हुई थी। जब एक सांड ने दूसरे सांड को तीन कोस धकेलकर खेली में औंधा पटक दिया था। आज भी सांडो का मुकाबला देचू में लगने वाला ऐसा मेला है, जिसकी कोई तय तारीख-तिथि नहीं। इसे देखने का सौभाग्य उस किस्मत वाले को मिलता है जो उस समय उस जगह मौजूद हो, जहां सांड लड़ रहे हों। फलोदी बाजार में बस इसी मुकाबले का सट्टा नहीं लगता, वरना इस मार्केट की इज्जत कहीं से कहीं पहुंच जाती। कुल मिलाकर बात यह है कि देचू में सड़कों पर आवारा पशुओं के जमावड़े का इलाज कोई पंचायत-पंच-सरपंच नहीं कर सका। अब पंचायत चुनाव आ रहे हैं। सांड याद दिला रहे हैं कि व्यवस्था में हम भी हैं। हमें भी सड़क का सरपंच बनना है। जो जीतेगा इलाका उसी का। सांडों में चुनाव प्रणाली नहीं है। वरना युद्ध में 20 पैंतरे और जुड़ जाते। इनपुट सहयोग- अनुराग हर्ष (बीकानेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
