जयपुर में आयोजित पश्चिम क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- केंद्र सरकार किसी भी राज्य पर योजनाएं थोपना नहीं चाहती, क्योंकि हर राज्य की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियां अलग हैं। राज्यों को 18 विभिन्न कृषि योजनाओं में से अपनी जरूरत के मुताबिक योजना चुनने और बजट उपयोग की स्वतंत्रता दी जाएगी। उन्होंने कहा- अन्नदाता किसान हमारे लिए जीवनदाता है। देश की 140 करोड़ आबादी की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके साथ किसानों के कल्याण, खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र को तकनीक से मजबूत बनाने को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं। मंगलवार को जयपुर स्थित मेरियट होटल में हो रहे इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए फार्मर आईडी को मुख्य आधार बनाया जाएगा। ‘फार्मर आईडी से होगा खाद का वितरण’ केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर में किसानों की डिजिटल आईडी बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इस आईडी में किसान और उसकी खेती से जुड़ी सभी जानकारी शामिल होगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में खाद का वितरण भी फार्मर आईडी के जरिए ही किया जाएगा। राजस्थान में अभी 10 लाख किसानों की आईडी बनना बाकी है, जिसे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि का पूरा बजट जल्द राज्यों को जारी करेगी, जबकि योजनाओं का सही इंप्लीमेंटेशन राज्यों को सुनिश्चित करना होगा। हाल के दिनों में आलू और प्याज के दामों में गिरावट पर चिंता जताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को राहत देते हुए कहा कि यदि किसान सरकारी एजेंसी के माध्यम से अपनी उपज दूसरे बाजारों में बेचना चाहते हैं, तो ट्रांसपोर्टेशन का खर्च केंद्र सरकार देगी।
केंद्रीय मंत्री ने दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता, दुनिया को खाद्यान्न निर्यात करने और किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य दोहराया। इसके लिए वैज्ञानिक पद्धतियों, डिजिटल कृषि मिशन और आधुनिक तकनीक को तेजी से अपनाने पर जोर दिया गया। उन्होंने उर्वरकों के बढ़ते उपयोग से धरती की घटती उपजाऊ क्षमता पर चिंता जताई और अधिकारियों को जल्दबाजी के बजाय गंभीर चर्चा कर ठोस निष्कर्ष निकालने के निर्देश दिए। साथ ही किसानों को खाद, बीज और सरकारी सहायता आसानी से उपलब्ध कराने के लिए ‘फार्मर आईडी’ बनाने पर विशेष जोर दिया। पश्चिम क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के हित में कई बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि खेती से महत्वपूर्ण कोई विभाग नहीं है और इस सम्मेलन का उद्देश्य राज्यों के साथ समन्वय बनाकर कृषि योजनाओं को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारना है। मुख्यमंत्री बोले- देश का विकास गांवों की पगडंडियों से ही संभव सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुसार देश का विकास गांवों की पगडंडियों से ही संभव है। उन्होंने किसानों को रिसर्च आधारित खेती अपनाने, लागत कम करने और पशुपालन व दुग्ध उत्पादन को आय का मजबूत साधन बनाने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा- राजस्थान फसल बीमा देश में नंबर-1 है। राज्य सरकार किसानों को केंद्रीय सम्मान निधि में अपनी ओर से 3 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता दे रही है। मुख्यमंत्री ने ईआरसीपी योजना के जरिए 17 जिलों तक सिंचाई जल पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई और सुझाव दिया कि जहां फसल उत्पादन अधिक है, वहां प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की जानी चाहिए। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। उन्होंने फल-सब्जी की खेती और रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग की अपील करते हुए कहा- आने वाली पीढ़ियों को उपजाऊ भूमि सौंपना हम सभी की जिम्मेदारी है। हालांकि इस दौरान सीएम ने ये भी कहा कि बदलते दौर में खेती घाटे का सौदा हो गई है। पहले जहां नौकर तीसरे पसंद होती थी और खेती पहली पसंद होती थी। वहीं अब नौकरी पहली और खेती तीसरी पसंद हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये भी कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के लिए राज्य अपनी जरूरत बताएं। जिस क्षेत्र के वैज्ञानिक चाहिएं उनको केंद्र राज्यों में भेजेगा।
राज्यों के कृषि रोडमैप भी हमको बनाने हैं। राजस्थान ने इसकी पहल कर दी है। इस पहल के लिए हम आज ही टीम गठित कर देंगे। कार्यक्रम में ये रहे मौजूद सम्मेलन में राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना, गोवा के मंत्री सुभाष फलदेसाई और महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भारणे सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।