झालावाड़ के असनावर निवासी विमला देवी ने स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। गणेश राजीविका समूह की सदस्य विमला देवी ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने कौशल और दृढ़ इच्छाशक्ति से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है। पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर सुमन ने बताया कि मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली विमला देवी अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए परिवार की आय बढ़ाना चाहती थीं। उन्हें उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम के तहत संस्थान में निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण की जानकारी मिली। विमला देवी ने यहां ज्वार-बाजरा-रागी के बिस्कुट व लड्डू, मक्का नमकीन, आंवला कैंडी, पापड़ और अचार बनाने का प्रशिक्षण लिया। इसके साथ ही उन्होंने उत्पादों की पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन की बारीकियां भी सीखीं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, विमला देवी ने लगभग 20 हजार रुपए की अपनी पूंजी से घर से ही व्यवसाय शुरू किया।
राजीविका समूह के माध्यम से एक प्रोड्यूसर ग्रुप बनाकर उन्हें लगभग 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिली, जिससे उनका काम तेजी से बढ़ा। उनके स्वादिष्ट और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राजीविका सरस मेलों में भी काफी पसंद किए जाने लगे। आज विमला देवी अपने व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 30 से 35 हजार रुपए की बचत कर रही हैं। इस आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे अपने बच्चों की शिक्षा व परवरिश बेहतर ढंग से कर पा रही हैं। परिवार का सहयोग उनके आत्मविश्वास को लगातार बढ़ा रहा है। अब विमला देवी अपने गांव और आसपास की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और अपने हुनर को पहचानकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
