विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आए स्टूडेंट्स की लिए परेशानी खड़ी हो गई है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने विदेशी मेडिकल छात्रों को दोबारा ऑफलाइन क्लास लेने के आदेश दिए है। यदि ऐसा होता है तो स्टेस्ट मेडिकल काउंसिल परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं देगी। काउंसिल का आदेश है कि कोरोना पीरियड में जो पढ़ाई ऑनलाइन की गई थी, उसे अब फिजिकल ऑनसाइट क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग लेनी होगी। एनएमसी सचिव डॉ. राघव लांगर की ओर से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्टेट मेडिकल काउंसिल (SMC) के रजिस्ट्रार को यह आदेश भेजा गया है। यह आदेश 6 मार्च 2025 को जारी हुए है। इधर, इस आदेश के बाद विदेश से डिग्री लेकर आए स्टूडेंट के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। इसे लेकर सोमवार को दिल्ली में एनएमसी के मुख्यालय पर स्टूडेंट्स एकत्र हो रहे हैं। ये स्टूडेंट्स एनएमसी के अधिकारियों से मिलकर नियम में छूट के लिए अपील करेंगे। वहीं इन आदेशों को लेकर FMG स्टूडेंट्स ने एकजुट होने का आंदोलन छेड़ दिया है। जितनी ऑनलाइन क्लास ली, उतनी ऑफलाइन पढ़ाई करनी होगी दरअसल, कोराना काल के समय ऑनलाइन पढ़ाई की गई थी। ऐसे में आयोग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जिन विदेशी मेडिकल छात्रों (FMG) ने अपने कोर्स का कोई हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से किया है, उन्हें उसकी भरपाई के लिए फिजिकल ऑनसाइट (ऑफलाइन) क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग अनिवार्य रूप से करनी होगी। ये आदेश 2020 और 2021 बैच के स्टूडेंट के लिए है। इसमें 5 मार्च 2026 को जारी पब्लिक नोटिस का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि ऑनलाइन पढ़ाई को केवल तभी मान्यता मिलेगी, जब उसकी भरपाई समान अवधि की ऑफलाइन क्लिनिकल और थ्योरी ट्रेनिंग से की जाए। इस मामले में कजाकिस्तान के अल्माटी से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आई जयपुर की डॉ. किरन का कहना है कि जब इंडिया में ऑनलाइन क्लास को स्वीकार किया गया है तो फिर विदेश की ऑनलाइन क्लास अस्वीकार कैसे हो सकती है? एनएमसी को संवेदनशील होकर काम करना चाहिए। इसलिए ये आदेश जारी किए आयोग ने साफ किया है कि यदि किसी छात्र ने एक शैक्षणिक वर्ष ऑनलाइन पढ़ाई की है, तो उसकी भरपाई बिना पढ़ाई की अवधि बढ़ाए नहीं की जा सकती। यानी ऑनलाइन पढ़ाई की अवधि के बराबर समय तक फिजिकल ट्रेनिंग और क्लास करना अनिवार्य होगा। NMC ने कहा है कि कुछ विदेशी मेडिकल संस्थान बिना वास्तविक ऑफलाइन ट्रेनिंग के “कम्पेनसेशन सर्टिफिकेट” जारी कर देते हैं। ऐसे सर्टिफिकेट नियमों के विपरीत माने जाएंगे और इससे प्राप्त डिग्री भारत में मान्य नहीं होगी। विदेश से एमबीबीएस के ये है नियम आयोग के अनुसार विदेश से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए
• पहले स्क्रीनिंग टेस्ट / FMGL परीक्षा पास करनी होगी
• इसके बाद एक वर्ष की अनिवार्य Compulsory Rotatory Medical Internship (CRMI) पूरी करनी होगी इसके बाद ही स्टेट मेडिकल काउंसिल स्थायी रजिस्ट्रेशन दे सकेगी। स्टेट मेडिकल काउंसिल की होगी मुख्य जिम्मेदारी, राजस्थान में आदेश जारी NMC ने स्पष्ट किया है कि विदेशी मेडिकल स्नातकों के आवेदन की जांच और स्थायी रजिस्ट्रेशन देने की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित स्टेट मेडिकल काउंसिल की होगी, जो राज्य के चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के साथ मिलकर सभी दस्तावेजों की जांच करेगी। इसे लेकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने 12 मार्च 2026 को आदेश जारी कर दिए है। इन आदेश में कहा गया हैञ- एनएमसी की गाइड लाइन के मुताबिक ही परमानेंट रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। अगर किसी स्टूडेंट ने ऑनलाइन पढ़ाई के बाद ऑफ लाइन का सर्टिफिकेट नहीं दिया है तो उसके परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।