भाजपा सरकार का ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ फार्मूला पहली ही बार अधूरा रहेगा। 2026 में प्रदेश के नगरीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव एक साथ नहीं होंगे। नगरीय निकायों में 2162 वार्डों की सीमाएं और जनसंख्या में फिर से बदलाव करना होगा। वार्ड 10245 से घटाकर फिर से करीब 8.5 हजार करने होंगे, तब चुनाव संभव हैं। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 25 बनाम 16 जिलों में के बीच फंस गए हैं। पुराने 12 और नए 16 जिलों के पंचायती राज संस्थाओं के बोर्ड का कार्यकाल बाकी है। वहीं पुराने 21 और नए 25 जिलों के बोर्ड का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इसी तरह 113 निकायों के चुनाव पर हाईकोर्ट का स्टे है। इन निकायों में 2162 वार्डों का फिर से गठन का नोटिफिकेशन जारी नहीं होगा, तब तक चुनाव अटके रहेगे। इस कारण एक साथ सभी 309 नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के चुनाव एक साथ नहीं हो पाएंगे। हालांकि सरकार की तैयारी है कि कोर्ट से स्टे खुलवा कर मई या जून तक एक साथ चुनाव कराए जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव के आदेश दे रखे हैं। वन स्टेट वन इलेक्शन तभी संभव जब कुछ बोर्ड भंग हो प्रदेश सरकार का वन स्टेट वन इलेक्शन का फार्मूला पंचायती राज संस्थाओं में तभी संभव है जब करीब 16 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति के बोर्ड भंग किए जाए। लेकिन इन जिलों में कार्यकाल पूरा होने में करीब 8 माह बचे हैं। ऐसे में परिषद या पंचायत समिति वाले कोर्ट गए तो मामला अटक सकता है। सरकारी वकील इन दिनों इसी मशक्कत में लगे हैं कि क्या रास्ता निकाला जाए। क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग ने पत्र लिखकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। मंत्री की तरफ से अभी जवाब नहीं भेजा। इन जिलों में चुनाव कभी भी प्रदेश के झालावाड़, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, सीकर, अजमेर, ब्यावर, पाली, भीलवाड़ा, जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर, बालोतरा, राजसमंद, नागौर, बांसवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, सलूंबर, चूरू, नीम का थाना, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जालोर और टोंक की करीब 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो गया। इन जिलों में कभी भी चुनाव कराए जा सकते हैं। इन जिलों में जिला परिषदों में कलेक्टर को प्रशासक लगा रखा है। ये जिले बने बाधा यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में सरकार एक अप्रैल के हिसाब से वन स्टेट वन इलेक्शन के फार्मूले से चुनाव कराना चाहती है तो 4 जिलों कोटा, बारां, श्रीगंगानगर और करौली में जिला परिषद और पंचायत समितियों का कार्यकाल अभी 8 माह बचा है। इन 4 जिलों में सरकार बोर्ड को 6 माह पहले तक ही भंग करने का पावर रखती है। यदि पहले भंग किए तो जनप्रतिनि कोर्ट जा सकते हैं। शेष 12 जिलों में परिषदों का काल 1 अप्रैल तक खत्म हो जाएगा।