वन मंत्री संजय शर्मा रविवार को बिना किसी को जानकारी दिए सवाई माधोपुर के रणथंभौर नेशनल पार्क में सफारी करने पहुंचे। आम टूरिस्ट की तरह ऑनलाइन बुकिंग करवाई और एक सामान्य पर्यटक की तरह सफारी का अनुभव लिया। उन्होंने तत्काल शेयरिंग स्लॉट में टिकट का भुगतान किया और फिर टोपी, चश्मा और मास्क लगाकर शाम की पारी में सफारी की। इस दौरान जंगल मे वन विभाग का गश्ती वाहन नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। वनकर्मियों से कहा- इस तरह से कैसे बाघों की मॉनिटरिंग होगी। पार्क में सफारी पर आने वाले सैलानी भगवान भरोसे है। वन मंत्री ने वनकर्मियों से कहा- अपने अधिकारियों को सर्किट हाउस भेजो, मैं उनसे बात करता हूं। रणथम्भौर दौरे के दौरान वन मंत्री ने बाघों की मॉनिटरिंग को लेकर विशेष ध्यान देने के भी निर्देश दिए। पहले देखिए… वन मंत्री की 2 तस्वीरें तीन घंटे तक घूमें, बारीकी से जायजा लिया
वन मंत्री संजय शर्मा ने रणथंभौर के जोन नंबर तीन में पूरे तीन घंटे तक घूमकर जंगल और व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्क के प्रबंधन, गाइड व्यवस्था, वाहन संचालन और पर्यटकों की सुविधा का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। इस दौरान पर्यटकों से भी बातचीत की और उनसे सफारी अनुभव को लेकर सुझाव भी मांगे। टिकट लेकर सफारी की
सफारी के दौरान वन विभाग को वन मंत्री की मौजूदगी की कोई जानकारी नहीं थी। वन विभाग के अफसरों और कर्मचारियों को तब पता चला, जब मंत्री ने सफारी पूरी करने के बाद अपनी पहचान उजागर की। वन मंत्री ने कहा- यह कदम इसलिए उठाया है, जिससे वह सामान्य पर्यटक की नजर से व्यवस्था की वास्तविकता देख सकें। उन्होंने सफारी के दौरान कमियां भी देखीं, जिस पर तुरंत एक्शन लेने के भी निर्देश दिए हैं।
