हेरिटेज और ग्रेटर निगम एक होने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है, बल्कि परेशानियां बढ़ गई है। लोग 20 किमी दूर से लालकोठी निगम मुख्यालय पहुंच रहे हैं। यहां भी राजधानी के 50 लाख लोगों को सुनने वाला कोई नहीं है। हालात यह है कि निगम अधिकारी भूखंड के पट्टे दो साल में भी जारी नहीं कर पाएं हैं। वहीं दूसरी तरफ अब पट़्टों का जैसा हाल फायर एनओसी का हो गया है। बिल्डिंगों का सर्वे होने के बाद भी निगम में 276 फायर एनओसी अटकी हुई है। इसमें से 125 बिल्डिंगों ने तो 30 दिन पहले ही फायर एनओसी के लिए आवेदन किया है। वहीं, करीब 100 आवेदन ऐसे हैं, जिन्हें 30 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है। बाकी आवेदन लंबे समय से पेंडिंग चल रहे हैं। इनमें से कुछ को एक साल और कई काे दो साल हो चुका है। इसके बावजूद भी एनओसी जारी नहीं हुई है। यह स्थिति तो तब है जबकि गोवा के क्लब में हादसा हो चुका है। इसके बावजूद भी निगम अधिकारी नहीं चेते हैं। दूसरी तरफ 10 प्रकरणों में फाइल तेजी से निगम में दौड़ी। इनकी एनओसी 14 दिनों में ही जारी कर दी गई। यहां तक कि एक ही दिन में फाइल को 6-6 अधिकारियों ने स्वीकृति जारी करी। दो साल चक्कर लगा रहे हैं, अब कर दी निरस्त
फायर शाखा के अधिकारी मनमर्जी से एनओसी जारी कर हैं। किसी को कुछ दिन में तो किसी की दो साल तक जारी नहीं करते। शाखा में कुछ फाइलें एक साल से पेंडिंग चल रही थी। ये बिल्डिंग मालिक चक्कर लगाते रहे। अब अधिकारियों ने फायर फाइटिंग उपकरण प्रॉपर नहीं होने और नियमों का हवाला देकर निरस्त कर दी। एक फाइल ताे ऐसी थी, जो 680 से ज्यादा दिन से पेंडिंग थी, लेकिन वाटर टैंक कैपेसिटी कम होने का हवाला दे निरस्त किया गया। बाबूओं के यहां ज्यादा लंबित
255 में से 124 फाइलें ऐसी हैं, जो डिलिंग बाबू (डीए) के स्तर पर पेंडिंग है। बाबू उन्हीं को मूव करते हैं, जिन पर निर्देश होते हैं। 45 से ज्यादा फाइलों सीएफओ और 30 फाइलें डीसी के स्तर पर पेंडिंग पड़ी है। “फायर एनओसी नहीं मिलने की कई शिकायतें मिली है। इनकी जांच कराई जा रही है। वहीं अधिकारियों को 30 दिन में फाइल डिस्पोजल करने के निर्देश दिए हैं।”
-पूनम, प्रशासक, नगर निगम