जालोर में रविवार को आयोजित हुई लोक अदालत में 19 साल के बेटे ने 6 साल से अलग रह रहे माता-पिता को साथ रहने के लिए समझाया। इसके बाद दोनों ने एक दूसरे को माला पहनाई और पूरा परिवार घर के लिए साथ-साथ निकल गया। यहां मौजूद लोगों ने बेटे को मां-बाप को लोक अदालत तक लाने की तारीफ भी की। वहीं ब्याज की राशि कम कराने और किस्त को लेकर एक विधवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के आगे रो पड़ी। कहा- जब तक वो (पति) थे तब तक ठीक था। अब रुपए भरने की हिम्मत नहीं है। पति की कैंसर से मौत हो गई है। ढोल बजा कर खर्च चलाती हूं, पैसे नहीं है भरने को मदद कीजिए। इसके बाद बैंक से समझाइश की गई और महिला की रकम का 30 हजार में सेटलमेंट किया गया। 6 साल से अलग रह रहे थे पति पत्नी बाल कल्याण समिति की सदस्य और वकील सरिता चौधरी ने बताया- जालोर के पिजोपुरा गांव निवासी सांवलाराम देवासी व खेड़ा गांव निवासी भूरी देवी की करीब 2004 में हिन्दू रीति रिवाज से शादी हुई थी। दोनों के बीच 15 साल बाद विवाद होना शुरू हो गया। दोनों 2019 से अलग रह रहे थे। दोनों के तीन बेटे भी हैं, सबसे बड़ा हमीराराम, उसके बाद भरत और फिर तेजाराम है। भूरी देवी ने 3 साल पहले बाल कल्याण समिति के सामने ये मामला रखा था। इसमें भरण-पोषण देने का मामला दर्ज करवाया था। पति सांवलाराम ने करीब 2025 तक भरण पोषण देता रहा। लगातार कोर्ट में चल रहे मामले के दौरान पूरा परिवार ही मानसिक तनाव झेल रहा था। बड़े बेटे ने मां को समझाया फिर पिता को राजी किया इस दौरान 19 साल के सबसे बड़े बेटे हमीराराम ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। वह लगातार मां-बाप से इस मामले को लेकर समझाइश करता रहा। दोनों छोटे भाइयों की परवरिश की दुहाई देता रहा। इसके बाद मामला लोक अदालत में पेश किया गया। लोकअदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राजेन्द्र सिंह चारण ने समझाइश की। इसके बाद दोनों पति-पत्नी सांवलराम और भूरी देवी के बीच समझौता हुआ। उसके बाद लोक अदालत में दोनों ने लोक अदालत में एक दूसरे को आमने-सामने माला पहनाकर एक दूसरे का जीवन भर साथ निभाने की कसम खाई। 50 हजार के लोन का ब्याज 1 लाख पहुंचा दूसरे मामले में जालोर के आहोर उपखण्ड के चुंडा गांव निवासी रूपाराम दमामी ने अपनी जरूरत के लिए आईडीबीआई बैंक से करीब 50 हजार का लोन 2020 में लिया था। लोन के कुछ पैसे भर दिए थे। लेकिन उसके बाद रूपाराम को कैंसर की बीमारी हो गई और 2023 में मौत हो गई। रूपाराम की पत्नी घर में अकेली कमाने वाली बची थी। ऐसे में वह घरों में मांगलिक कार्यों में ढोल बजा कर ब्याज भर रही थी। आर्थिक हालत बिगड़ी तो वह अब रुपए भरने में सक्षम नहीं रही। ऐसे में 2025 में ब्याज की रकम 1 लाख रुपए पहुंच गई। 30 हजार पर सेट हुआ मामला मामला लोक अदालत में आया तो महिला रोने लगी। हाथ जोड़ने लगी। आसपास खड़े लोगों को अपनी समस्या बताई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अहसान अहमद की समझाइश के दौरान मूल रकम भरने की बात की। जिसके बाद आईडीबीआई बैक के द्वारा 30 हजार पर सैटलमेंट कर दिया।

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