जगराओं नगर कौंसिल अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की गई है। इसकी जांच में पहले स्थानीय निकाय मंत्री ने अध्यक्ष को क्लीन चिट दे दी थी। विभागीय अधिकारी द्वारा मंत्री के निर्णय को पलटने से एक नया प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा हो रही है। अध्यक्ष पद को लेकर सत्ताधारी पार्टी से जुड़े पार्षदों और कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष राणा के धड़े में लंबे समय से खींचतान चल रही थी। इस सत्ता संघर्ष के कारण नगर के विकास कार्य ठप पड़े हैं और शहर में सफाई व्यवस्था भी बिगड़ गई है। किस शिकायत पर हुई कार्रवाई कुछ दिन पहले चरणजीत सिंह नामक व्यक्ति ने शिकायत नगर कौंसिल अध्यक्ष राणा के खिलाफ शिकायत दी थी। आरोप लगाया था कि राणा अपने पद का दुरुपयोग कर पुरानी अनाज मंडी और अन्य करोड़ों रुपए की नगर कौंसिल संपत्तियों पर अवैध कब्जों को संरक्षण दे रहे हैं। अवैध दुकानों हटाने के पुलिस प्रशासन के आदेश पर अध्यक्ष ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसकी जांच के आधार पर, स्थानीय निकाय विभाग ने पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट, 1911 की धारा 22 के तहत अध्यक्ष राणा को पद से हटाने के आदेश जारी किए हैं। ये आदेश अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्थानीय सरकार), पंजाब, तेजवीर सिंह, आईएएस की ओर से जारी किए गए हैं। मंत्री ने दी थी क्लीन चिट, अब कार्रवाई बनी चर्चा गौरतलब है कि इसी शिकायत पर, स्थानीय निकाय मंत्री ने 12 मई 2025 को अध्यक्ष राणा द्वारा प्रस्तुत उत्तर को स्वीकार करते हुए शिकायत को खारिज कर दिया था। उस समय अध्यक्ष के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस भी दफ़्तर में दाखिल कर दिया गया था। अब उसी शिकायत के आधार पर विभागीय अधिकारी ने मंत्री के पूर्व निर्णय को पलटते हुए अध्यक्ष को हटाने का आदेश जारी किया है। इस विरोधाभासी कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वास्तविक अधिकार किसके पास है – मंत्री के पास या विभागीय अधिकारी के पास। राजनीति के तहत हुई कार्रवाई, आप विधायक ने रची साजिश: राणा राणा ने कहा कि उन पर कार्रवाई सिर्फ राजनीति के तहत हुई है। उनको पद से हटाने के लिये पंजाब व दिल्ली के बड़े आकाओं का हाथ है। पूरी साजिश आप विधायक सरबजीत कौर मानूके द्वारा रची गई है। आप विधायक ने शहर का विकास करवाने की जगह उन्हें ही पद से हटाने पर जोर लगाया है। विधायक के कारण ही कि शहर का विकास होने की जगह विनाश होता गया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले पंजाब के लोकल बाडी मंत्री द्वारा इसी मामले में जांच के बाद क्लीन चिट दी थी अब उसी मामले कार्रवाई सवाल खड़ा करता है।
