लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद 23 वर्षीय हिमांशु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद खन्ना में मंगलवार को परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया। मृतक का शव एसएसपी कार्यालय के सामने अमृतसर-दिल्ली नेशनल हाईवे की सर्विस रोड पर रखकर न्याय की मांग की, जिससे लगभग एक घंटे तक यातायात बाधित रहा। हिमांशु मूल रूप से बिहार के खगड़िया जिले का निवासी था। उसका परिवार पिछले कुछ वर्षों से खन्ना के दलीप सिंह नगर, गली नंबर 7 में रह रहा है। हिमांशु को एक साल पहले मोबाइल चोरी के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद था। परिजनों के अनुसार, जेल प्रशासन ने 8 नवंबर को अचानक हिमांशु की मौत की सूचना दी, लेकिन उन्हें मौत के कारण या समय के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। हिमांशु की मां सरिता देवी ने आरोप लगाया कि जेल के पुलिसकर्मी रोजाना हिमांशु की बेरहमी से पिटाई करते थे। जेल प्रशासन ने शव देखने नहीं दिया उन्होंने बताया कि हिमांशु ने खुद फोन पर उन्हें जेल में अत्याचार किए जाने की जानकारी दी थी। परिवार को पूरा विश्वास है कि उसकी हत्या की गई है। परिजनों का यह भी आरोप है कि जब वे लुधियाना में हिमांशु का शव देखने पहुंचे, तो जेल प्रशासन ने उन्हें शव देखने की अनुमति नहीं दी। सरिता देवी ने कहा कि उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया और उनके साथ गाली-गलौज की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह प्राकृतिक मौत होती तो शव छिपाने की क्या आवश्यकता थी। पुलिस ने दिया कार्रवाई का भरोसा तो खत्म किया धरना धरने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ। एसपी (आई) पवनजीत चौधरी पुलिस टीम सहित मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। उन्होंने परिवार की बात सुनी और समझाया कि यह मामला लुधियाना जिले से संबंधित है, इसलिए वहां की पुलिस और प्रशासन इस पर कार्रवाई करेंगे। एसपी (आई) चौधरी ने परिवार को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।